कांग्रेस के नाराज ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक सोमवार को उस वक्त बेहद अहम हो गई, जब बैठक के भीतर से ही प्रभारी ऊषा नायडू को फोन लगा दिया गया। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 के ब्लॉक अध्यक्ष ने बैठक के बीच फोन पर नायडू को साफ शब्दों में बता दिया कि आज शाम होने वाली जूम मीटिंग का सभी ब्लॉक अध्यक्ष बहिष्कार करेंगे। वजह भी दो टूक बताई गई कि कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्षों को कहा गया था कि सिर्फ छात्रों को प्रवेश मिलेगा। पार्टी का निर्देश मानते हुए जमीनी कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत से काम किया, लेकिन बाद में नेताओं और उनके पट्ठों के अंदर पहुंचने की बात सामने आई तो कार्यकर्ताओं को लगा कि पार्टी का कहा मानने वालों के साथ ही धोखा हो गया।
फोन पर नाराजगी यहीं नहीं रुकी। एक ब्लॉक अध्यक्ष ने ऊषा नायडू से साफ कहा कि विमानतल पर अंदर जाने वाले नेताओं की सूची उपलब्ध कराई जाए। सूची नहीं दी गई तो आरटीआई लगाकर सूची निकलवाने की बात तक कह दी गई। बैठक में मौजूद ब्लॉक अध्यक्षों का कहना था कि जिन कांग्रेस नेताओं ने तय नियमों को तोड़कर प्रवेश किया, उनके खिलाफ संगठन को कार्रवाई करनी चाहिए। यानी मामला अब सिर्फ राहुल गांधी से मुलाकात का नहीं रह गया है, सवाल पार्टी के भीतर नियमों की बराबरी का बन गया है।
ब्लॉक अध्यक्षों का रुख देखकर ऊषा नायडू ने कहा कि वह बुधवार को इंदौर आकर सभी से वन-टू-वन चर्चा करेंगी और शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। माना जा रहा है कि मामला अब इंदौर से आगे दिल्ली तक भी पहुंच गया है, जिससे संगठन के स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हलचल बढ़ गई है।
लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ इसके बाद आया। बैठक शुरू होने के महज ग्यारहवें मिनट में बंद कमरे की यह बैठक सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गई। बैठक में मौजूद नेता भी अचानक घटनाक्रम बाहर आने से हैरान रह गए। अब चर्चा नाराजगी से आगे बढ़कर इस सवाल पर है कि आखिर बंद कमरे की बातचीत बाहर पहुंची कैसे? सूत्रों के मुताबिक, सूचना बाहर पहुंचाने वालों का पता लगाने की कवायद भी कल से जारी है।


