
सीहोर। कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष लेने के लिए उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ से उपजी अव्यवस्था से बीमार हुए तीन साल के बच्चे की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर गुरुवार रात को एक और महिला ने दम तोड़ दिया। इस तरह अब तक मृतकों की संख्या तीन हो गई है। करीब 50 लोग लापता बताए जा रहे हैं। यहां रुद्राक्ष का वितरण बंद कर दिया गया है। शुक्रवार शाम तक अधिकांश लोग अपने घरों के लिए लौट चुके हैं।
भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल हो गया है। इसी बीच, बता दें, गुरुवार को कथावाचक प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम मंदिर में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा और रुद्राक्ष वितरण महोत्सव की शुरुआत के पहले ही दिन लाखों लोगों के पहुंचने से भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग हजारों वाहन घंटों जाम में फंसे रहे, वहीं मंदिर परिसर में खाने, पीने और ठहरने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण से अव्यवस्था का आलम रहा।
कथा के दूसरे दिन भी मंदिर परिसर में काफी लोग मौजूद रहे, लेकिन रुद्राक्ष वितरण कार्यक्रम नहीं हो सका और रुद्राक्ष काउंटर मंदिर समिति ने हटा दिए।इधर, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डा. प्रवीर गुप्ता ने बताया कि गुरुवार को महाराष्ट्र के मालेगांव निवासी 52 वर्षीय मंगलाबाई की मौत हो गई थी, जिसका पीएम शुक्रवार को किया गया। इस महिला की मौत हार्ट अटैक से हुई है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के ही अकोला निवासी 40 वर्षीय मंगला की मौत गुरुवार-शुक्रवार की रात हुई है।
डा. गुप्ता ने बताया कि इस महिला का शव बिना पीएम कराए स्वजन अपने घर ले गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के जलगांव निवासी विवेक भट्ट के तीन वर्षीय बेटे अमोद की तबीयत शुक्रवार को बिगड़ गई, जिसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। वहीं थाना कोतवाली सीहोर में 50 से अधिक महिला-पुरुष के अपने साथियों से बिछड़ने की सूचना दी गई है, जिनमें से अधिकतर लोग मिल चुके हैं।
की गई थी व्यवस्थाएं : पं.मिश्रा
कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा हमने श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं की जो बात कही थी, वह सही थी। इसको लेकर हमने कथा पंडाल, ठहरने, भोजन, पार्किंग, पानी और शौचालय के इंतजाम किए थे, लेकिन अनुमान के अनुसार दो लाख लोग रोज आना था, पर दो दिन पहले से ही लोग आकर रुक गए, वहीं कथा के पहले दिन ही 20 लाख से अधिक लोग आए, जिससे अव्यवस्था हो गई।
इधर, एसडीएम अमन मिश्रा का कहना है कि विठ्ठलेश समिति द्वारा हमसे जो अनुमति ली गई थी, उसमें संख्या नहीं थी, लेकिन डेढ़ से दो लाख लोगों के आने का अनुमान बताया था, जिसको देखते हुए हमने दस लाख लोगों के हिसाब से इंतजाम किए थे, लेकिन 20 लाख से अधिक लोग यहां पहुंच गए, जिससे हालात बिगड़ गए। देखा जाए तो दूसरे दिन भी पांच से सात लाख लोग यहां पहुंचे, लेकिन वह आते-जाते रहे, जिससे हालात काबू में हैं हाईवे भी बहाल है।

