मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चतुर्थ राष्ट्रीय HR-CSR सम्मेलन ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ किया
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 दिवसीय 'अभ्युदय' सम्मेलन में भगवान श्रीकृष्ण पर शोध को बढ़ावा देने का वादा किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय HR–CSR सम्मेलन ‘अभ्युदय’ का 24 अक्टूबर 2026 को शुभारंभ किया।
कांग्रेस का उद्घाटन
सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलन कर उन्होंने 25 अक्टूबर को जारी रहने वाली बैठक का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. अगुष इंद्र उद्याना ने पारम्परिक घंटी भेंट की।
भगवान श्रीकृष्ण पर शोध
डॉ. यादव ने कहा कि जहाँ गीता समाप्त होती है, वहीं से भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रारंभ होता है। उन्होंने सरकार को शोधार्थियों और संस्थाओं को पूरा समर्थन देने का वादा किया।
उन्होंने बताया कि सरकार म.प्र. में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरण पड़े स्थानों को श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय के रूप में विकसित कर रही है।
डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर गहन शोध और सम्पूर्ण जीवन वृत्त की मीमांसा करने वाले शोधार्थियों और ऐसी संस्थाओं को सरकार पूरा साथ, समर्थन और सहयोग भी देगी।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहल
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ और उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन में अनेक कष्ट सहे। भगवान श्रीकृष्ण अपने संकल्पों पर अडिग रहते थे और यशोदा मैया को वचन दिया था कि कंस को मारकर मथुरा लौटते ही माखन खाऊंगा।
कन्हैया को माखन खिलाने की इच्छा पर उन्होंने इनकार कर दिया, क्योंकि श्रीकृष्ण ने यशोदा को वचन दिया था। उन्होंने मोर पंख को सिर पर धारण कर प्रकृति पूजा की संस्कृति को प्रोत्साहन दिया।
भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद भी सत्ता नहीं संभाली और महाभारत के युद्ध के बाद युधिष्ठिर को राजगद्दी पर बैठाया। विक्रमादित्य काल में भी यही प्रसंग देखने को मिलता है और भगवान श्रीकृष्ण व सम्राट विक्रमादित्य ने स्वयं को कभी राजा नहीं माना।
दोनों ने द्वारिका नगरी की स्थापना कर उद्यमिता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और यह शिक्षा व्यवस्था भी समरसता के विचार से आगे बढ़ रही है।
भगवान श्रीकृष्ण के विराट व्यक्तित्व से हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था, उद्यमशीलता, मित्रता, माता-पिता के प्रति सम्मान और सेना के अनुशासन की सीख मिलती है। शासन को पद के स्थान पर दायित्वों को सेवा भाव से निभाना, कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ाना और ज्ञान को शोध में लगाना, श्रीकृष्ण के जीवन की दृष्टि से महत्वपूर्ण सीख है। भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके सामाजिक न्याय का उदाहरण प्रस्तुत किया और श्रीकृष्ण पाथेय न्याय के माध्यम से भगवान के व्यक्तित्व पर चर्चा के लिए देशभर में आयोजन होने चाहिए।
उद्योग और कौशल विकास
हाल के एशियन गेम्स में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 11 मेडल जीते, जिनमें 5 स्वर्ण पदक हैं। प्रदेश में शासकीय स्तर पर 18 अकादमी संचालित हैं और सरकार ने तीन स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा की है।
एक ग्लोबल स्किल पार्क भी भोपाल में है और मध्यप्रदेश सबसे तेजी से औद्योगिक निवेश आकर्षित करने वाला राज्य है। टाटा समूह के प्रतिनिधि ने कौशल विकास को लेकर मध्यप्रदेश में विस्तार करने की मंशा जाहिर की।
सुरक्षा और सामाजिक मुद्दे
राज्य में नक्सलवाद बड़ी समस्या थी और प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने ही सबसे पहले लाल सलाम को आखिरी सलाम किया। प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और नई शिक्षा नीति लागू कर योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इससे नशा मुक्ति में भी सहयोग मिलेगा और आयुष महाविद्यालयों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। योग और वेलनेस के प्रोत्साहन को लेकर सरकार बड़े प्रयास कर रही है।
सम्मेलन का उद्देश्य
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन के लिए यूनाइटेड काउंसिल फॉर एंशिएंट विजडम-यूनाइटेड कॉन्शसनेस, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, संस्कृति विभाग तथा यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन को बधाई दी गई। अपर मुख्य सचिव संस्कृति और श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के न्यासी सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि प्रदेश में विरासत को संरक्षित करने वाली सरकार है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगे बढ़कर इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं और श्रीकृष्ण पाथेय के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ स्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
भगवान श्रीराम ने भी मध्यप्रदेश के चित्रकूट में अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय गुजारा था और ओंकारेश्वर में नर्मदा के किनारे आचार्य शंकर को ज्ञान प्राप्त हुआ। इन सभी से संबंधित स्थलों को संरक्षित करते हुए सरकार आगे बढ़ रही है और ओंकारेश्वर में एकात्म धाम की स्थापना की गई है।
इससे भविष्य में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के अवसर भी विकसित होंगे।
डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को अभ्युदय का मंत्र दिया है और यह शब्द पवित्र गीता से निकला है।
उन्होंने कहा कि जब जीवन में शांति आती है, तब यही शांति आत्मिक समृद्धि भी लाती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक, भारतीय ज्ञान परंपरा और विरासत का संरक्षण करते हुए आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए संकल्पित हैं और वे मध्यप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं।
उन्होंने इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला। सम्मेलन का परिचय और उद्देश्य: ‘अभ्युदय – Integrating ESG & Civilisational Wisdom for Comprehensive Wellbeing’ का यह चौथा राष्ट्रीय HR–CSR सम्मेलन है।
यह सम्मेलन पर्यावरण, सामाजिक कल्याण और सुशासन (ESG) को भारतीय सभ्यतागत ज्ञान और नैतिक दृष्टि के साथ जोड़कर समग्र विकास की संभावनाओं पर विचार करने के लिए किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय सभ्यतागत ज्ञान और आधुनिक ईएसजी दृष्टिकोण के बीच संबंध, प्रासंगिकता और व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा करना, कर्मयोग, लोक संग्रह और धर्म जैसे विचारों को एचआर, सीएसआर, नेतृत्व और संस्थागत निर्णयों से जोड़ना, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, समावेशी सामाजिक विकास और नैतिक सुशासन के लिए व्यावहारिक दिशा तथा नीतिगत सुझाव विकसित करना तथा सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है। यूनाइटेड काउंसिल फॉर एंसिएन्ट विजडम, श्री कृष्ण पाथेय न्यास तथा मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति/संस्कृति एवं पर्यटन विभाग की सक्रिय सहभागिता है।
यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाऊंडेशन का उल्लेख भी सहयोगी संस्था के रूप में किया गया है।

28 सितंबर, सोमवार
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