‘SIR में स्थानीय अफसरों को ज्यादा अधिकार मिलें’:महाराष्ट्र CEO ने भी लेटर लिखा था, 4 मांगें की थीं; दो चुनाव आयुक्त भी जता चुके आपत्ति
चुनाव आयोग के पोर्टल ECINet में स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अधिकारों को लेकर उठे सवालों के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम का 24 सितंबर को लिखा लेटर मंगलवार को सामने आया।
चुनाव आयोग के पोर्टल ECINet में स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अधिकारों को लेकर उठे सवालों के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम का 24 सितंबर को लिखा लेटर मंगलवार को सामने आया।
चोकलिंगम ने इसमें वोटर रिकॉर्ड की गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में ERO को ज्यादा अधिकार देने और सॉफ्टवेयर में 4 बदलाव की मांग की थी।
उनका कहना था कि किसी वोटर के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर हर मामले में एक जैसी प्रक्रिया लागू नहीं होनी चाहिए। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि किस वोटर को सुनवाई के लिए बुलाना है, कौन से दस्तावेज लेने हैं और किन मामलों को अपने स्तर पर निपटाया जा सकता है।
उनसे पहले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी ECINet में स्थानीय अधिकारियों के अधिकार सीमित करने पर आपत्ति जताने की खबरें आई थीं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति जताई थी।
एस चोकलिंगम ने कहा था- हर मामले में सुनवाई की जरूरत न पड़े
महाराष्ट्र CEO ने अपने लेटर में खासतौर पर उन मामलों का जिक्र किया, जिनमें रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद मतदाताओं को नोटिस दिया जाता है।
उनका कहना है कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूसरे कमजोर वर्गों के लोगों को हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सॉफ्टवेयर में ERO को मामले के हिसाब से फैसला लेने का विकल्प मिलना चाहिए।
विवाद के बीच 26 सितंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक हुई। इसमें आपत्तियों पर फैसला लिए गए।
आपत्ति: सुनवाई का फैसला ERO करें: कौन से मामले में मतदाता को बुलाना है, यह ERO तय कर सकें
बदलाव: अब किसी मतदाता, जिसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है या उसके जानकारी में गड़बड़ी है- के मामले में BLO घर जाकर दस्तावेज लेगा। मतदाता को सामान्य तौर पर ERO/AERO के सामने सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। केवल अपवाद वाले मामलों में ERO तय करेगा कि सुनवाई जरूरी है। सुनवाई संभव हो तो ऑनलाइन होगी।
आपत्ति : दस्तावेज तय करने की छूट। ERO जरूरत के हिसाब से दस्तावेज स्वीकार कर सकें।
बदलाव: आयोग ने कहा कि BLO संबंधित मतदाता से दस्तावेज लेकर ECINet पर अपलोड करेंगे और ERO उन दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेगा। आयोग ने अलग से यह स्पष्ट नहीं किया कि ERO को तय लिस्ट से बाहर कोई भी दस्तावेज स्वीकार करने की छूट दे दी गई है।
आपत्ति: मामले खुद निपटा सकें: ERO को कुछ मामलों में अपने स्तर पर फैसला लेने की सुविधा मिले। बदलाव: आयोग ने कहा कि फैसला ERO करेगा।
आपत्ति : सॉफ्टवेयर में अधिकार मिलें: ECINet में ERO के कानूनी अधिकारों के मुताबिक विकल्प दिए जाएं। बदलाव: आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए कमेटी बनाई है। समिति की अध्यक्षता सीनियर उप चुनाव आयुक्त करेंगे। इसमें IIT या IIIT के एक्सपर्ट को भी शामिल किया जाएगा। आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को और लचीलापन चाहिए तो सॉफ्टवेयर में उसकी व्यवस्था की जाएगी।
महाराष्ट्र में SIR जारी, ड्राफ्ट लिस्ट में 21% मतदाताओं के नाम कटे
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 अगस्त को जारी हुई थी। ड्राफ्ट में राज्य के करीब 21.1% मतदाताओं की संख्या कम हुई थी। अंतिम वोटर लिस्ट 16 नवंबर को जारी होनी है।
फिलहाल ड्राफ्ट लिस्ट पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी वाले मामलों की जांच और नोटिस की प्रक्रिया भी जारी है।
आयोग के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई
इधर, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने की सहमति दी है। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।
मामला CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने रखा गया। सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले कानून के मुताबिक सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए।
23 सितंबर: EC के अंदर मतभेद की रिपोर्ट सामने आई
चोकलिंगम के लेटर से एक दिन पहले, 23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग के अंदर मतभेद से जुड़ी एक रिपोर्ट आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति जताई थी।
इन आपत्तियों में वोटर लिस्ट, SIR और ECINet से जुड़े फैसले शामिल थे। दोनों चुनाव आयुक्तों ने ECINet में फैसले लेने और सॉफ्टवेयर का कंट्रोल दिल्ली से होने पर सवाल उठाए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कहना था कि वोटर लिस्ट से जुड़े कानूनी अधिकार ERO, जिला निर्वाचन अधिकारी और CEO के पास हैं। इसलिए ECINet में भी इन अधिकारियों को अपने अधिकारों के मुताबिक काम करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

21 सितंबर, सोमवार
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