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स्वतंत्र तो हुए लेकिन विचारों में कहां स्वतंत्र हुए…!!!
आज देशभर में 75 वे स्वतंत्रता दिवस की धूम है… आम से लेकर खास ने अपनी-अपनी हैसियत अनुसार वस्त्र पहन झंडा वंदन किया… आजाद देश में सभी ने स्वतंत्रता दिवस की एक दूसरे को शुभकामना भी आत्मीयता और खुशी के साथ दी… स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिकों ने आज अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन भी बखूबी किया… 75 साल पूर्व आज ही के दिन वो आजादी मिली थी… जो अंग्रेजो के राज में छीनी गई थी… विचारों की अभिव्यक्ति भी न थी… जो हुकुम हो गया… वो सर आंखों पर रखना था… और न रख सको तो सीधे मरना था… फैसला भी आमजन को सौंप रखा था… जीवन चाहिए या मरण … वो आपको ही चुनना था… अब हुकुम कुछ भी हो मानना तो था, हाँ में हाँ मिलानी थी… बोलती बंद रखना थी… आंखें खुली रखना थी… कान खुले रखना थे… जो कुछ बोले या जो फरमान आए उसको सुनते ही अमल में लाना था… तो यह थी 75 साल पूर्व की आजादी… जो बेड़ियो में कहीं कैद थी… जैसे जैसे समय बदला वैसे-वैसे क्रांतिकारियों ने आवाज बुलंद की… मरे पड़े लोगों के अंदर जान फूंकते गए… हिम्मत दिखाने लिए हमेशा जान जोखिम में डालते रहे… औरों को आजादी का अर्थ समझाते गए… तब जाकर कुछ माने… आजादी के परवाने बने… और आजादी के लिए संघर्ष कर अपनी जान भी कुर्बान करते चले गए… आज वो आजादी से भी ज्यादा आजादी है… स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है… जिसको जो बोलना है, बोल सकता है… अपनी आवाज अकेला ही बुलंद कर सकता है… आज आजादी तो मिली… लेकिन यह आजादी अधूरी सी मिली… हर व्यक्ति में आज वर्चस्व की लड़ाई है… वो अहम पन की लड़ाई है… एक-दूसरे को बड़ा दिखाने के साथ नीचा दिखाने की लड़ाई है… आज आजादी के मायने तो बदले लेकिन, स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिको के विचारों में कहां स्वतंत्रता आई… इनके विचारों में तो वो ही जलन की बू आई… अपने को ऊपर उठाने के लिए शरीर पर चढ़ने की नोबत भी आई तो फिर चढ़कर आगे निकलने में कोई कसर नहीं छोड़ी भाई… भाई-भाई बोलकर… विश्वासघात करते गए… अपनी मंजिल कैसे पाएं विचार करते गए… यह आजादी मिली तो इसका फायदा उठाते गए… अपने को ही घात कर ऊपर चढ़ते गए… विचारो में तुम्हारे कभी स्वतंत्रता नही आई… आजादी तुम जैसे लोगो को कभी रास न आई…
Abhishek Raghuvanshi August 15, 2022