Indore
पैर काटे, संकल्प नहीं; संघर्ष ने सदानंदन मास्टर को संसद तक पहुंचाया
कहा, “हमला मेरे शरीर पर हुआ, विचारों पर नहीं; संघ से मिला आत्मविश्वास और आत्मीयता मुझे हर विपरीत परिस्थिति में खड़ा रखती रही 19 लोगों का रक्त मेरी देह में दौड़ता है - सदानंदन जी कन्नूर की राजनीतिक हिंसा से लेकर राज्यसभा तक की यात्रा सुनाते हुए बोले सदानंदन, बाधाएं तूफान बनकर आएं, आदर्श की ज्योति कभी नहीं बुझ सकती! हार्दिक दवे के साथ संवाद में खुला जीवन का दूसरा पक्ष, वामपंथ से वैचारिक दूरी, कृत्रिम पैरों के साथ जीवन, अवसाद, युवाओं की चुनौतियां और राष्ट्रबोध पर बेबाक बातचीत “मेरे दोनों पैर काट दिए गए, लेकिन मेरे विचारों की दिशा नहीं काटी जा सकी।
Abhishek Raghuvanshi August 10, 2026