
इंदौर में अवैध कॉलोनियों में प्लॉट काटकर बेचने के मामले में जिला प्रशासन द्वारा सख्ती की जा रही है। हाल ही में 16 केसों की जांच में भारी गड़बड़ियां मिली। जांच में पता चला कि 11.665 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कॉलोनियां काटकर 800 से ज्यादा प्लॉट बेच गए। मामले में कलेक्टर आशीष सिंह ने इन 16 मामलों में संंबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए है। इन जमीनों की कीमत करोड़ों में है। ये अवैध कॉलोनियां देपालपुर जूनी इंदौर, महू, राऊ, मल्हारगंज, जूनी इंदौर सहित अन्य क्षेत्रों में काटी गई है। इसके पूर्व ऐसे ही मामलों में 57 एफआईआर दर्ज हो चुकी है अपर कलेक्टर गौरव बैनल ने बताया कि ऐसे अन्य मामलों की जांच अभी जारी हैं। हाल ही के जिन 16 मामलों में एफआईआर के आदेश दिए गए हैं उनमें मल्हारगंज में जय अम्बे गृह निर्माण सोसायटी के अशोक व्यास ने कोडियावडीं गांव में 12 प्लाट अवैध रूप से काटकर बेचे।
महू में ग्रीन हिल डेवलपर्स धर्मेंद्र सिंह यादव और बिशनदास ने जामली व जंदलाई में 19 प्लाट बेचे। राऊ में भोले कृपा रियल स्टेट भैयालाल चौधरी, राजू चौधरी और हरिशंकर चौधरी ने 15 प्लाट बेचे। राऊ में अरुण सिसोदिया और सुनील परमार ने धन्नड़ गांव में 105 प्लाट काटकर बेचे।
इसी तरह बिचौली हप्सी के मोरोद नेहरू गांव में विक्रम चौधरी ने 27 प्लाट बेचे। यहीं पास के कैलोद करताल गांव में मुकेश मिश्रा ने 43 प्लॉट बेचे। देपालपुर के गांव काली बिल्लौद में शुभम चौधरी ने 79, प्रियेश गौतम ने 259, वरदीलाल ने 64, किशन सिंह राठौर और राम दशरथ ने 49 प्लाट बेचे।
छोटा बांगड़दा में नितिन आणिया ने 25 प्लाट बेचे। जूनी इंदौर में नाथूसिंह और रुपेंद्र शर्मा ने 12 और रुपेंद्र ने ही एक अन्य स्थान पर 28 प्लॉट बेचे। सांवेर के मांगल्या में सुधीर ने 15 और पीर कराडिया गांव में धर्मेंद्र बावने ने 41 प्लॉट बेच दिए।
दरअसल प्रशासन को इस तरह की कई शिकायतें बीते समय में जनसुनवाई सहित अलग-अलग माध्यमों से मिलती रही। इस पर इन मामलों की जांच की गई। चूंकि दस्तावेज परीक्षण और मौका मुआयना में समय लगता है इसलिए छानबीन के बाद रिपोर्ट तैयार की गई। ऐसे 57 मामलों में पूर्व में भी एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसी कड़ी में अब इन 16 मामलों में एफआईआर दर्ज होगी।
