
इंदौर। महिलाओं को मां का रूप इसलिए माना जाता है, क्योंकि उनमें हिम्मत और अपार शक्ति होती है। कभी भी किसी चीज से वे डरती नहीं हैं। यदि बात करें, महिला पुलिसकर्मियों को तो प्रतिदिन उन्हें बड़े-बड़े अपराधियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनका साहस और हिम्मत ही काम आती है। हम बात कर रहे हैं क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा में सब इंस्पेक्टर अनिला पाराशर की। वे कई बड़े अपराधियों को अपने साहस से पकड़ने में कामयाब रहीं। कई बार मानवता दिखाते हुए भी अपने जोखिम पर बच्चों को घर पहुंचा चुकी हैं।
पाराशर बताती हैं कि पंढरीनाथ थाने पर रहते हुए एक शिकायत आई थी, जिसमें बच्चों को नशा करवाकर कुछ लोग भीख मंगवा रहे थे। जो आरोपित थे, वे भी नशा करते थे और उनके ऊपर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज थे। जब थाने पर शिकायत आई तो इन्हें खोजना शुरू किया। कई बार आनाकानी की और भागने का भी प्रयास किया।
बच्चों को उनके जाल से छुड़ाकर सजा दिलवानी थी, क्योंकि इस तरह ये अन्य बच्चों को भी नशे की लत का आदी बना देते हैं। चार आरोपित आकाश, संतोषी, रामचंद्र और इंद्रजीत को पकड़ने के साथ ही इन्हें 10 साल की सजा भी दिलवाई। साथ ही बच्चों का अच्छा भविष्य बने, इसलिए उन्हें एक संस्था का पास भेजा। अनिला पाराशर कोरोना के दौरान राऊ थाने में पदस्थ थीं।
अन्य राज्यों के बच्चों को घर छोड़ा
इस दौरान थाने में 16 बच्चों की गुमशुदगी के प्रकरण दर्ज हुए थे। ये बच्चे अन्य राज्यों में थे। ऐसे में बच्चों को लाने को कोई तैयार नहीं था। आला अधिकारियों ने भी कहा था कि अन्य राज्य में जाने के दौरान कोरोना हो जाए तो वहीं रुक जाना, वापस शहर मत आना। लेकिन बच्चों को बचाने को प्राथमिकता थी तो स्वयं की जोखिम पर अन्य राज्यों में जाकर सभी बच्चों को सकुशल टीम के साथ वापस इंदौर लेकर आईं।
इस दौरान यह खुद अपने बच्चे को घर पर छोड़कर गई थीं, लेकिन ड्यूटी को प्राथमिकता देते हुए अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटीं। अनिला सेवा में भी पीछे नहीं रहती हैं। ठंड के दौरान देर रात तक ड्यूटी करते हुए जब भी कोई जरूरतमंद फुटपाथ पर बैठा रहता है तो उन्हें कंबल वितरित करती हैं।

