
अमेरिका में कैपिटल हिल यानी संसद में हिंसा के दौरान पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के ऑफिस में डेस्क पर पैर रखकर बैठने वाले आरोपी को साढ़े 4 साल जेल की सजा सुनाई गई है। अर्कान्सास के रहने वाले 63 साल का रिटायर्ड फायरफाइटर रिचर्ड बिगो बार्नेट 6 जनवरी 2021 को हुई कैपिटल हिंसा में शामिल था।
तब वो हाथ में एक स्टन गन और 4.5 किलो का स्टील का डंडा लेकर पेलोसी के ऑफिस में दाखिल हुआ था। पेलोसी की डेस्क पर पैर रखे हुए बार्नेट की तस्वीर तेजी से वायरल हुई थी। इसके अलावा उसने एक ऑफिशियल लेटर पर पेलोसी के लिए नोट भी लिखा था। इस मामले में उस पर 8 चार्ज लगाए गए थे। इनमें गुंडागर्दी और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल थे।
इस साल जनवरी में बार्नेट को सभी आरोपों में दोषी पाया गया था। कोर्ट में कार्यवाही के दौरान उसने कहा कि वो अपनी गलती मानता है लेकिन ये उसने जानबूझकर नहीं किया था।

बार्नेट ने कहा- मैं शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आया था
ट्रायल के दौरान बार्नेट ने दावा किया कि वो अर्कान्सास से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए पहली बार वॉशिंगटन आया था। जब हिंसा चल रही थी तब उसे टॉयलेट जाना था। इसी वजह से वो गलती से पेलोसी के ऑफिस में दाखिल हो गया। उस वक्त वहां 2 फोटोग्राफर्स मौजूद था। उन्होंने बार्नेट को वहां आराम से रहने को कहा। ये सुनकर वो कुर्सी पर बैठ गया और पैर टेबल पर रख दिया। उसे नहीं अंदाजा था कि इतना बड़ा जुर्म होगा।
हिंसा के वक्त बार्नेट ने कहा था- हमने संसद वापस ले ली
प्रॉसिक्यूटर्स ने बताया कि कैपिटल बिल्डिंग से बाहर आकर बार्नेट ने भीड़ को संबोधित भी किया था। उसने कहा था- आज हमने अपनी संसद वापस ले ली और मैंने नैन्सी पेलोसी का ऑफिस वापस ले लिया। प्रॉसिक्यूटर्स ने जजों से बार्नेट को 7 साल की सजा देने की मांग की थी।
हालांकि, बार्नेट ने कहा था कि उसका मकसद डराना या किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। इस पर डिफेंस के वकील ने सजा को 6 महीने से कम रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बार्नेट सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आया था और न चाहते हुए हिंसा में फंस गया।

अब 4 पॉइंट्स में जानिए कैपिटल हिंसा क्या है?
1. अमेरिका में 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल यानी अमेरिकी संसद में ट्रम्प के समर्थकों ने हिंसा की थी। 3 नवंबर 2020 को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग में बाइडेन को 306 और ट्रम्प को 232 इलेक्टोरल वोट मिले। नतीजे सामने आते ही ट्रम्प और उनके समर्थकों ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए।
2. वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने में जुटी तो ट्रम्प के समर्थक संसद में घुस गए। वहां तोड़फोड़ और हिंसा की। इसमें एक पुलिस अफसर समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा के बाद ट्रम्प पर अपने समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था।
3. 18 महीने तक मामले की जांच चली। पिछले साल दिसंबर में जांच कमेटी ने एक 845 पेज की रिपोर्ट तैयार की। इसमें ट्रम्प को दोषी ठहराया गया। उनके खिलाफ क्रिमिनल केस चलाने की सिफारिश की गई। इसके लिए 1000 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 940 से ज्यादा लोगों पर भी आरोप लगाए गए। इनमें से 500 लोग अब तक अपना जुर्म कबूल कर चुके हैं।
4. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जांच कमेटी ने ट्रम्प पर राष्ट्रपति चुनाव में हार के फैसले को पलटने, विद्रोह भड़काने, आधिकारिक कार्रवाई में बाधा डालने, साजिश रचने, झूठे बयान देने और देश को धोखा देने के आरोप लगाए। इसके बाद कमेटी ने मामले को जस्टिस डिपार्टमेंट को रेफर कर दिया।

