
नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने चिंता जताई है। एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
SCBA ने अपने बयान में कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन के दौरान संतुलित और कानूनसम्मत कार्रवाई होना आवश्यक है।
घायल छात्रों और वकीलों के इलाज की मांग
एसोसिएशन के अनुसार, कथित लाठीचार्ज में कई छात्र घायल हुए हैं। बयान में यह भी दावा किया गया कि घटना के दौरान SCBA और अन्य कानूनी समुदाय (लीगल फ्रेटरनिटी) से जुड़े कुछ सदस्य भी चोटिल हुए। संगठन ने प्रशासन से सभी घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
SCBA ने कहा कि वह संविधान प्रदत्त अधिकारों, मानव गरिमा और कानून के शासन की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है तथा पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करता है।
संसद मार्च के दौरान हुई थी पुलिस कार्रवाई
सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के लिए निकले थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी सामने आए, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज का दावा किया गया। हालांकि, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
आंदोलन में शामिल अधिकांश प्रदर्शनकारी छात्र और युवा थे। वे कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
पुलिसकर्मी भी हुए घायल
सूत्रों के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। बताया जा रहा है कि घायल सुरक्षाकर्मियों की संख्या करीब 50 के आसपास है। प्रदर्शन के दौरान संसद भवन की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई।
इस बीच, आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न राजनीतिक नेताओं और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है।
अभिजीत दीपके का कहना है कि वांगचुक का स्वास्थ्य देश के लिए महत्वपूर्ण है और उन्हें अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता। फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।

