आरएपीटीसी इंदौर एवं 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर का संयुक्त दीक्षांत परेड समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न
पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने नव आरक्षकों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं जनविश्वास के साथ कार्य करने का दिया संदेश “पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, साहस और जनता के विश्वास का प्रतीक”- डीजीपी श्री मकवाणा मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास एवं अनुशासित परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इंदौर स्थित रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय परिसर में आरएपीटीसी इंदौर एवं 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के नव आरक्षकों का संयुक्त दीक्षांत परेड समारोह अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया।
पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने नव आरक्षकों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं जनविश्वास के साथ कार्य करने का दिया संदेश
“पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, साहस और जनता के विश्वास का प्रतीक”- डीजीपी श्री मकवाणा
मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास एवं अनुशासित परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इंदौर स्थित रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय परिसर में आरएपीटीसी इंदौर एवं 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के नव आरक्षकों का संयुक्त दीक्षांत परेड समारोह अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा उपस्थित रहे। इस गरिमामय आयोजन की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशेष सशस्त्र बल मुख्यालय भोपाल श्री चंचल शेखर द्वारा की गई।
नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन केवल एक औपचारिक दीक्षांत समारोह नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण, परिश्रम एवं राष्ट्रसेवा के संकल्प का गौरवपूर्ण उत्सव है। उन्होंने कहा कि आज से नव आरक्षक केवल पुलिस बल का हिस्सा नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, कानून की गरिमा एवं राष्ट्र की सुरक्षा के प्रहरी बन गए हैं।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नाम मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक एवं सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संस्थापक के.एफ. रुस्तमजी के नाम पर रखा गया है, जिनका मध्यप्रदेश पुलिस की व्यवस्थाओं, कल्याणकारी गतिविधियों एवं संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि रुस्तमजी जैसे महान अधिकारियों की विरासत से प्रेरणा लेकर नव आरक्षकों को सेवा, अनुशासन एवं कर्तव्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।
श्री मकवाणा ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, साहस एवं जनता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने नव आरक्षकों से कहा कि तिरंगे के समक्ष ली गई शपथ को वे अपने जीवन का सर्वोच्च आदर्श बनाएं तथा हर परिस्थिति में कानून, संविधान एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा करें।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि में नव आरक्षकों ने शारीरिक दक्षता के साथ-साथ आउटडोर ड्रिल, हथियार संचालन, फील्ड क्राफ्ट, कानून-व्यवस्था नियंत्रण, साइबर अपराध, आपदा प्रबंधन एवं आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों में दक्षता प्राप्त की है। चुनाव ड्यूटी एवं अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं में सहभागिता के माध्यम से उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशील जनसेवा का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आए, तो उसे वर्दी में कठोरता नहीं बल्कि सुरक्षा, विश्वास, सहानुभूति एवं न्याय का भरोसा दिखाई देना चाहिए। समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी यह विश्वास होना चाहिए कि पुलिस उसके साथ खड़ी है।
डीजीपी ने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की जिम्मेदारियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं तनावपूर्ण हैं। पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू कर ध्यान एवं योग आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि पुलिस बल मानसिक रूप से अधिक संतुलित एवं सक्षम बन सके।
विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री मकवाणा ने कहा कि चंबल क्षेत्र में दस्यु उन्मूलन से लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना तक विशेष सशस्त्र बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान केंद्र पर हार्ट अटैक से पीड़ित अधिकारी को सीपीआर प्रशिक्षित जवानों ने तत्काल सहायता देकर उसका जीवन बचाया। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण पुलिस बल की मानवीय संवेदनशीलता एवं सेवा भावना को प्रदर्शित करते हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी केवल कानून के रक्षक नहीं, बल्कि शांति, विश्वास एवं सुरक्षा के दूत हैं। उनके निर्णय, व्यवहार एवं कार्यशैली से पुलिस विभाग की छवि निर्मित होती है। उन्होंने नव आरक्षकों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे अपने आचरण, अनुशासन एवं सेवा भावना से जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे।
पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारियों, प्रशिक्षकों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने नव आरक्षकों को शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से दृढ़ एवं नैतिक रूप से जागरूक पुलिसकर्मी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के अंतर्गत आरएपीटीसी इंदौर के 482 तथा 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के 135 नव आरक्षकों सहित कुल 617 नव आरक्षकों का दीक्षांत पुलिस महानिरीक्षक श्री चन्द्रशेखर सोलंकी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नव आरक्षकों द्वारा प्रस्तुत अनुशासित, आकर्षक एवं सशक्त परेड ने उपस्थित सभी गणमान्यजनों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
परेड उपरांत नव आरक्षकों ने राष्ट्र, संविधान एवं जनसेवा के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने की शपथ ली। इसके पश्चात अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसएएफ श्री चंचल शेखर ने प्रशिक्षण की संरचना एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण किया।
समारोह में परेड निष्क्रमण उपरांत नव आरक्षकों द्वारा साइलेंट ड्रिल, पीटी डिस्प्ले एवं यूएसी का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। अश्वरोही दल द्वारा प्रस्तुत विशेष गतिविधियों ने उपस्थितजनों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में बीएसएफ बैंड, प्रथम वाहिनी बैंड एवं 15वीं वाहिनी बैंड द्वारा आकर्षक प्रस्तुति दी गई।
समारोह में पुलिस आयुक्त इंदौर श्री संतोष सिंह, पुलिस महानिरीक्षक ग्रामीण श्री अनुराग, पुलिस उप महानिरीक्षक एसएएफ इंदौर, श्री अमित सिंह, बीएसएफ पुलिस महानिरीक्षक श्री तेजिन्दर सिंह सिद्धू, पुलिस उप महानिरीक्षक आरएपीटीसी श्री धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, इंदौर जोन एसएएफ के कमांडेंट और अन्य पुलिस अधिकारीगण के साथ सेवानिवृत्त अधिकारीगण, परिवारजन एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

28 सितंबर, सोमवार
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