एससी, एसटी अत्याचार निवारण राहत प्रकरणों में जनजाति वर्ग के 202 प्रकरणों में 2 करोड़ 37 लाख रूपये और अनुसूचित जाति वर्ग के 281 प्रकरणों में 4 करोड़ 35 लाख रूपये का हुआ भुगतान
संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत राहत योजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न

संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में संभागायुक्त कार्यालय में आज अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत राहत योजना को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई। संभागायुक्त द्वारा न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा के दौरान पाया कि इंदौर झोन का दोषसिद्धी 69 प्रतिशत है, जो प्रदेश के कुल प्रतिशत से अधिक है। इस संबंध में खंडवा जिले में किये गये दोषसिद्धी की सराहना की गई।
बैठक में इंदौर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स, पुलिस अधीक्षक, जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त और अभियोजन अधिकारी शामिल हुए। संभागायुक्त कार्यालय इंदौर से आईजी श्री अनुराग, संयुक्त आयुक्त (विकास) श्रीमती शिवानी वर्मा, डीसीपी श्री राजेश त्रिपाठी, जनजातीय कार्य विभाग के उपायुक्त श्री गणेश भाभर, अजाक्स के पुलिस अधीक्षक श्री शेरसिंह भूरिया, अभियोजन अधिकारी श्री भदौरिया एवं संबंधित अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाडे ने अधिकारियों से जनजातीय कार्य तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग कमेटी की तिमाही बैठक में किये गए कार्यों की समीक्षा की। अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण राहत के कुल 358 प्रकरणों में से 202 प्रकरणों में 2 करोड़ 37 लाख रुपए भुगतान किया जा चुका है, शेष 158 लंबित प्रकरणों के भुगतान की कार्रवाई की जा रही है।

इसी तरह अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण राहत के 467 प्रकरणों में से 281 को 4 करोड़ 35 लाख रूपये का भुगतान किया गया है तथा 186 प्रकरण लंबित हैं। संभागायुक्त डॉ.खाड़े ने अधिकारियों से कहा कि जनजातीय कार्य विभाग अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत हितग्राहियों को राहत राशि का भुगतान समयसीमा में किया जाए। अनुसूचित जाति व जनजाति के प्रकरणों में महत्पूर्ण रूप से जाति प्रमाण पत्रों के कार्यों में तेजी लायें। न्यायालय में चल रहे आपराधिक प्रकरणों का निराकरण समय सीमा में किया जाये। साथ ही अनुविभागीय अधिकारियों के पास जो लंबित प्रकरण हैं, उनका भी समयसीमा में निराकरण करें।
संभागायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि समय पर बैठकें आयोजित कर जानकारी पोर्टल पर अपलोड अनिवार्य रूप से करें। चिह्नित प्रकरण की जांच बेहतर रूप से किया जाए। प्रारंभ से ही प्रकरणों को फॉलो करे, तो दोषसिद्धि में ज्यादा फर्क पड़ेगा। इस संबंध में खंडवा जिले की सराहना की गई।
संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में नशे के विरूद्ध चलाये जा रहे व्यापक जनजागरूकता अभियान “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” को स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को जोड़ें। सामुदायिक स्तर पर भी इस अभियान का प्रभावी रूप से प्रचार-प्रसार किया जाये। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वाहन चालकों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित करें। सड़कों का संधारण गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयसीमा में पूर्ण करें। साथ ही जनजातीय कार्य विभाग द्वारा धरती आबा योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए गए कार्यों को समय पर पूर्ण करें। शालाओं में नामांकन शत-प्रतिशत सुनिश्चित करें और विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण करें। उन्होंने कहा कि संभाग में अवैध कालोनियां नहीं बनें, इसके लिये निजी कॉलोनाईजरों के संचालकों से संवाद करें। मास्टर प्लान पर चर्चा करें।
बैठक में आई जी अनुराग ने कहा कि राहत राशि के प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र के अभाव के कारण कुछ प्रकरणों में भुगतान में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि लंबित प्रकरणों की राहत राशि प्रदान करने के लिए शासन से राशि की डिमांड आवश्यक रूप से कर लें। बैठक में चिह्नित अपराधों में दोषसिद्धि एवं दोषमुक्ति की समीक्षा की गई। दोषसिद्धि का इंदौर झोन में 69 प्रतिशत रहा जो प्रदेश के प्रतिशत से अधिक है। दोषसिद्धि पर ज्यादा ध्यान देने के निर्देश दिए गये। बताया गया कि वर्ष 2024 में दोषसिद्धि 77 प्रतिशत, वर्ष 2025 में 68 प्रतिशत तथा 2026 में 60 प्रतिशत दोषसिद्धि रहा।
आईजी श्री अनुराग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनजातीय समाज के व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के प्रति संवेदनशीलता बरतें और प्राथमिकता के साथ उनका निराकरण करें। इन प्रकरणों को जिला स्तरीय समिति की बैठक में रखें। उन्होंने कहा कि जो प्रकरण 5 वर्ष से अधिक पुराने हैं उनका निराकरण आगामी 31 दिसम्बर 2026 तक करना सुनिश्चित करें। जो प्रकरण 2 वर्ष से अधिक लंबित है उनका निराकरण वर्ष 2027 तक पूर्ण करें। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी और चालानी कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए।

