अब जीत के बाद MIC में जगह बनाने की दौड़:एससी कोटे से रिपीट होगा या महिला को मिलेगी जगह; रेस में सांवेर विधानसभा के भी पार्षद

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर में जीतू यादव के भाजपा और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) से बाहर होने के बाद एमआईसी में दावेदारों के शामिल होने की रेस शुरू हो गई है। एमआईसी गठन के पहले हुए अघोषित समझौते के तहत इंदौर शहर के पांचों विधानसभा से दो-दो सदस्य शामिल किए गए थे।
जीतू यादव को इंदौर-2 विधानसभा से शामिल किया गया था। यानी अब इस विधानसभा का पार्षद ही एमआईसी में शामिल किया जा सकता है। बहरहाल एमआईसी में नए सदस्य की एंट्री होने तक जीतू यादव के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल विभाग या तो महापौर खुद अपने पास रखेंगे या शेष नौ में से किसी एक सदस्य को दे सकते हैं।
पार्टी सूत्रों की मानें तो जीतू यादव एससी वर्ग से आते हैं। इस वजह से यह पद एससी वर्ग के पार्षद को मिलेगा। इसके चलते इंदौर-2 के विधायक रमेश मेंदोला को अपने एससी वर्ग के समर्थक पार्षद को जगह मिलेगी। बताया जा रहा है कि इस रेस में सांवेर विधानसभा में आने वाले वार्ड से सुरेश कुरवाड़े को जगह दी जा सकती है।
दूसरा, एमआईसी में अभी एक भी महिला शामिल नहीं है। ऐसे में इंदौर-2 विधानसभा से पार्षद पूजा पाटीदार को भी जगह दी जा सकती है। पूजा पाटीदार को भी मेंदोला गुट का नजदीकी माना जाता है। ऐसे में यदि पार्षद पूजा पाटीदार की एंट्री एमआईसी में होती है तो वे इस एमआईसी की पहली महिला सदस्य होंगी।
अभी नंदू पहाड़िया एससी कोटे से
एमआईसी में फिलहाल एससी कोटे से नंदू पहाड़िया शामिल हैं। यदि मेंदोला अपने गुट के पार्षद को एमआईसी में जगह दिलवाना चाहते हैं तो वे अपनी विधानसभा के साथ कंप्रोमाइज भी कर सकते हैं। हालांकि इस रेस में कांग्रेस से भाजपा में आए मनोज मिश्रा के नाम की भी चर्चा है। वे मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थक बताए जाते हैं।
अभी ये हैं एमआईसी सदस्य
एमआईसी के दस सदस्यों में से अब नौ सदस्य बाकी रह गए हैं। अभिषेक शर्मा, राजेश उदावत, राजेंद्र राठौर, अश्विनी शुक्ला, निरंजनसिंह चौहान, नंद किशोर पहाड़िया, प्रिया दांगी, राकेश जैन, मनीष शर्मा।
जीतू यादव केस में शनिवार को ऐसे बदलता गया घटनाक्रम
शनिवार को सीएम मोहन यादव इंदौर में थे। इसलिए घटनाक्रम सुबह से ही तेजी से बदलता गया। तीन दिन पहले भी जब सीएम ने ट्वीट कर 6 लोगों की गिरफ्तारी की बात कही थी, तब भी पुलिस एक्शन में आई थी। आठ दिन के संघर्ष के बाद कमलेश कालरा की दोनों मांगें पूरी हो गईं यानी जीतू यादव को पार्टी से निष्कासित भी कर दिया और एसआईटी का गठन भी हो गया।

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