नौकरी के लिए 10 महीने से भटक रही थी महिला… निगमायुक्त ने सख्ती दिखाई, 3 घंटे में मिली अनुकंपा नियुक्ति

By Abhishek Raghuvanshi
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कविता धोलपुरे, जो दस महीने से अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही थी, ने निगम मुख्यालय में जनसुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सेवा यूनिट प्रभारी राजेश करोसिया की लापरवाही का आरोप लगाया। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने तत्काल करोसिया को निलंबित किया और कविता को अनुकंपा नियुक्ति का पत्र प्रदान किया।
कविता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए दस महीने तक संघर्ष किया।
स्वास्थ्य सेवा प्रभारी करोसिया को निगमायुक्त ने निलंबित किया।
निगमायुक्त ने लंबित मामलों के त्वरित समाधान का आदेश दिया।
इंदौर। निगमकर्मी पति पंकज की मौत के बाद पत्नी कविता धोलपुरे अनुकंपा नियुक्ति के लिए दस माह से निगम मुख्यालय के चक्कर काट रही थी। स्वास्थ्य सेवा यूनिट प्रभारी राजेश करोसिया नियुक्ति के नाम पर उसे यहां से वहां भटका रहा था। कविता परेशान होकर मंगलवार को निगम मुख्यालय में होने वाली जनसुनवाई में पहुंची। उसने निगमायुक्त शिवम वर्मा को करोसिया की करतूत बताई। निगमायुक्त ने मौके पर ही करोसिया को बुलाकर फटकार लगाई। हाथों हाथ उसे निलंबित करने के आदेश दे दिए। निगमायुक्त की सख्ती देख अन्य अधिकारी, कर्मचारी भी सकते में आ गए। निगमायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग उपायुक्त एसके सगर से कहा कि मामले में तत्काल कार्रवाई करें। तीन घंटे बाद ही कविता के हाथ में अनुकंपा नियुक्ति का पत्र था।
बेटी का भरण पोषण होगा आसान
दिवंगत निगमकर्मी पंकज धोलपुरे की पत्नी कविता भी इन्हीं आवेदकों में से एक थी। मंगलवार को अनुकंपा नियुक्ति का पत्र मिलने के बाद कविता ने कहा कि अब उसके लिए बेटी का भरण पोषण करना आसान होगा। वह दस माह से भटक रही थी।
निगमायुक्त – कहिए आपकी क्या समस्या है।
कविता – मै दस माह से अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही हूं। न पेंशन मिल रही है न अनुकंपा नियुक्ति। बेटी का भरण पोषण भी नहीं कर पा रही हूं।
निगमायुक्त – किस विभाग का मामला है, संबंधित को बुलवाइए।
निगमायुक्त (राजेश करोसिया से) – आप आवेदन क्यों नहीं निपटा रहे हो। यह चल क्या रहा है, यहां पर। कागज क्यों नहीं ले रहे हो।
राजेश करोसिया – साहब ये कभी मेरे पास आए ही नहीं।
निगमायुक्त (नाराज होते हुए) -अजीब मनमर्जी है। यहां चल क्या रहा है। शर्म करो। आपको निलंबित कर रहे हैं।
निगमायुक्त (उपायुक्त से) – आप इस मामले में कार्रवाई करो। दो घंटे में कार्रवाई हो जाना चाहिए नहीं तो आप भी सस्पैंड हो जाएंगे। सिर्फ यही केस नहीं, अगले पांच दिन में सभी केस का निराकरण होना चाहिए। इन्हें तत्काल निलंबित करो। (राजेश करोसिया की ओर देखते हुए)
निगमायुक्त महिला से – आप यही रूको अभी दो घंटे में आपको चेक भी मिलेगा, अनुकंपा नियुक्ति भी देंगे।

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