
चार साल पुराने सिक्योरिटी गार्ड हत्याकांड में जिला कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। मुख्य आरोपी आशीष पिता भागचंद विश्वकर्मा (34) निवासी अमननगर, मूसाखेड़ी को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि उसका साथी अभिषेक पिता कैलाश खांडे (29) निवासी आलोकनगर, मूसाखेड़ी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने पाया कि अभिषेक की उंगली पर मौजूद चोट ताज़ा नहीं थी, जबकि आरोप था कि हत्या के समय उसकी उंगली कट गई थी।
ऐसे हुआ खुलासा
अभिषेक पर आरोप था कि वह वारदात में शामिल था और छुरी से हमला करते समय उसकी उंगली कट गई थी। पुलिस ने उसका इलाज भी कराया था। सुनवाई में बचाव पक्ष के वकील अपूर्व जैन ने इलाज करने वाले डॉक्टर जितेंद्र तोमर से पूछताछ में साबित किया कि अभिषेक की उंगली पर ताज़ा चोट नहीं थी। डॉक्टर ने माना कि चोट पुरानी थी और हाथ पर कट के निशान भी नहीं थे। इसी वजह से कोर्ट ने अभियोजन का दावा खारिज कर उसे बरी कर दिया।
महिला को लेकर था विवाद
तिलक नगर पुलिस ने 13 मार्च 2021 को स्कीम 94 स्थित मिनियस पॉवर प्रा. लि. ऑफिस की पहली मंजिल से सिक्योरिटी गार्ड रामजी कृष्णमुरारी शुक्ला का शव बरामद किया था। वह 12 मार्च की रात ड्यूटी पर था और सुबह मृत अवस्था में मिला।जांच में सामने आया कि रामजी के परिवार की एक महिला को लेकर आरोपी आशीष से विवाद चल रहा था। आशीष उस महिला से एकतरफा प्रेम करता था और शादी करना चाहता था। आरोप है कि इसी विवाद के चलते उसने अपने साथी अभिषेक के साथ मिलकर छुरी और हथौड़े से रामजी की हत्या कर दी।
आजीवन कारावास की सजा सुनाई
मामले में कंपनी के ही सिक्योरिटी गार्ड धर्मेंद्र मिश्रा निवासी देवनगर की रिपोर्ट पर हत्या का केस दर्ज किया गया। पुलिस ने आशीष और अभिषेक दोनों को गिरफ्तार किया था। चार साल चली सुनवाई के बाद 11 अगस्त को कोर्ट ने आशीष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि अभिषेक को बरी कर दिया।
