हमास की धमकी-हमले बंद करो वरना बंधकों को मारेंगे:अपने 100 लोगों को बचाने दुश्मन देश में घुसे थे इजराइली सैनिक; अब क्या करेंगे नेतन्याहू
7 अक्टूबर की सुबह बॉर्डर पर फेंसिंग को तोड़ हमास के एक हजार से ज्यादा लड़ाके इजराइल में घुस गए। इन्होंने न सिर्फ निहत्थे लोगों की बेरहमी से हत्या की बल्कि 150 लोगों को बंधक बनाकर उन्हें गाजा ले गए।
7 अक्टूबर की सुबह बॉर्डर पर फेंसिंग को तोड़ हमास के एक हजार से ज्यादा लड़ाके इजराइल में घुस गए। इन्होंने न सिर्फ निहत्थे लोगों की बेरहमी से हत्या की बल्कि 150 लोगों को बंधक बनाकर उन्हें गाजा ले गए।
इनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। इजराइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गाजा पर 1700 से ज्यादा एयरस्ट्राइक किए। इसके बाद हमास ने धमकी दी कि अगर इजराइल रुका नहीं तो वो सभी बंधकों को जान से मार देंगे।
ये पहला मौका नहीं जब फिलिस्तीन के नाम पर लड़ने वालों ने इजराइलियों को बंधक बनाया हो। 47 साल पहले 1976 में फिलिस्तीन लिबरेशन के लड़ाकों ने 100 यहूदियों को बंधक बना लिया था। तब इजराइल ने ऑपरेशन थंडरबोल्ट के जरिए इन्हें बचाया था।
1973 की अरब-इजराइल जंग को खत्म हुए 3 ही साल गुजरे थे। तभी जून 1976 में इजराइल के लोगों पर एक और मुसीबत आन पड़ी। 27 जून को इजराइल की राजधानी तेल अवीव से उड़ान भर कर पेरिस जाने वाली फ्लाइट को हाइजैक कर लिया गया। रात करीब 11 बजे एयर फ्रांस की फ्लाइट 139 ने तेल अवीव से उड़ान भरी थी। ये ग्रीस की राजधानी एथेंस होते हुए पेरिस जा रही थी। इस फ्लाइट में 246 यात्रियों के अलावा 12 क्रू मेंबर भी सवार थे।
डेढ़ घंटे के भीतर ये फ्लाइट एथेंस पहुंच गई, जहां से इस प्लेन में 62 और लोग सवार हुए। प्लेन ने एथेंस से पेरिस के लिए जैसे ही उड़ान भरी 4 पैसेंजर अचानक अपनी सीट से खड़े हुए और बंदूकें निकाल लीं। इन आतंकियों के पास ग्रेनेड और हथगोले भी थे। इनमें से एक ने कॉकपिट में जाकर पायलट और बाकी क्रू मेंबर्स को अपने कब्जे में ले लिया। पैसेंजर्स कुछ समझ पाते इससे पहले प्लेन हाईजैक किया जा चुका था।
प्लेन के पायलट से ये घोषणा करवाई गई कि इस प्लेन को पॉपुलर फ्रंट फॉर लिब्रेशन ऑफ फिलिस्तीन के लड़ाकों ने हाईजैक कर लिया है। इन 4 आतंकियों में से 2, जर्मन जबकि 2 अरबी थे। विमान से संपर्क टूटते ही ये जानकारी इजराइल की इंटेलिजेंस एजेंसी को दी गई। एजेंसी अलर्ट हो गई और ये पता करने की कोशिश करने लगी कि विमान का एक्सीडेंट हुआ है या कुछ और।
वहीं, आतंकी इस प्लेन को पेरिस के बजाय लीबिया के बेनगाजी शहर ले गए। यहां हाईजैकर्स ने प्लेन में तेल भरवाया और 7 घंटे तक बेनगाजी एयरपोर्ट पर ही विमान को रोके रखा। विमान में सवार एक महिला की जब तबीयत खराब हुई तो हाईजैकर्स ने उसे छोड़ दिया।
इसके बाद आतंकियों ने कई अरब देशों से संपर्क कर हाईजैक विमान को लैंड कराने की परमिशन मांगी। हालांकि, इजराइल से दुश्मनी होने के बावजूद इंटरनेशनल लॉ की वजह से किसी देश ने आतंकियों को इसकी इजाजत नहीं दी। आखिरकार आतंकियों ने युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन से संपर्क किया जिसने उन्हें अपने देश में विमान लैंड कराने की इजाजत दे दी। इसके बाद आतंकियों ने प्लेन को युगांडा के एंतेबे हवाई अड्डे पर लैंड कर दिया।
तस्वीर तत्कालीन इजराइल डिफेंस फोर्स के चीफ हैम बार लेव (दांए) युंगाडा के तानाशाह ईदी अमीन से मुलाकात के दौरान की है। हैम बार लेव, ईदी अमीन को हाईजैक के मामले के बारे में बात कर रहे थे। हांलाकि, अमीन अंदर से इस हाईजैक के समर्थन में थे।
अमीन के सैनिक आतंकियों के निर्देश पर विमान की सुरक्षा करने लगे। वहीं, पैसेंजर्स को एक सीक्रेट जगह पर ठहराया गया। विमान के हाईजैक किए जाने की खबर सुनकर इजराइल में अफरा-तफरी मच गई। अगले दिन आतंकियों ने 5 मिलियन डॉलर और इजराइल समेत 4 देशों की जेल में बंद 53 फिलिस्तीनियों को रिहा करने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वो लोगों को मारना शुरू कर देंगे।
इजराइली सरकार ने तुरंत सेना प्रमुख और खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ के साथ मीटिंग की। उस समय इजराइल के प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन थे। इजराइल के पास बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने के लिए कोई रास्ता नहीं था। एन्तेबे इजराइल से 2,200 मील की दूरी पर था। यहां इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद की भी ज्यादा पकड़ नहीं थी। उसे अपने 100 लोगों को छुड़ाने के लिए कम से कम 100 सैनिकों की जान खतरे में डालनी पड़ती। ऐसे में उन्होंने आतंकियों से बात करना शुरू कर दिया, ताकि उन्हें कुछ समय मिल जाए।
इस दौरान खुफिया एजेंसी मोसाद के जासूसों ने एंतेबे हवाई अड्डे से खुफिया जानकारी जुटानी शुरू कर दी। हाईजैकर्स से 4 जुलाई तक का समय मांग लिया। इन सब के बीच प्रधानमंत्री, उनकी कैबिनेट, मिलिट्री चीफ ने मिलकर एक प्लान को मंजूरी दी। इसे हकीकत में बदलने की जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतन्याहू को दी गई। योनातन इजराइल के अब के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई थे।
हालांकि, कुछ दिनों में ऐसा हुआ जिसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था। आतंकियों ने कुछ बंधकों को छोड़ दिया। इसके बावजूद इजराइल की चिंता खत्म नहीं हुई थी। आतंकियों ने इजरालियों और दूसरे देशों के 116 यहूदियों को नहीं छोड़ा था, वो अब भी उनकी कैद में थे।
3 जुलाई को इजराइली कैबिनेट ने लंबी बैठक के बाद ऑपरेशन थंडरबोल्ट को हरी झंडी मिली। मोसाद को ये भी जानकारी हाथ लगी की एंतेबे एयरपोर्ट के जिस टर्मिनल पर बंधकों को रखा गया उसे इजराइल की एक कंपनी ने ही बनाया था। इससे मिशन में शामिल सभी कमांडों को बिल्डिंग का मैप मिल गया। इससे उन्हें प्लानिंग में आसानी हो गई।
फिर 3 जुलाई को ही युगांडा सरकार को भनक लगे बिना इजराइल से 100 कमांडो की टीम सी 130 सुपर हरकुलिस विमानों से एंतेबे के लिए रवाना हो गई।
विमानों में उन्होंने काली मर्सीडीज कारों के एक दस्ते को भी लोड किया था। इसकी वजह ये थी कि उस समय युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन काले रंग की मर्सीडीज से ही ट्रैवल करता था। इससे आतंकियों और युगांडा की सेना को आसानी से भ्रम में डालने के लिए इजराइल ने यह चाल चली। इन विमानों के साथ दो बोइंग 707 विमान भी थे। इनमें एक में मेडिकल टीम थी, इन्हीं से यात्रियों को वापस लाया जाना था।
विमान रात में एंतेबे हवाई अड्डे पर उतरे। इसके ठीक बाद काली मर्सीडीज कारों का काफिला तेजी से टर्मिनल की उस बिल्डिंग की में घुस गया जहां इजराइलियों को बंधक बनाकर रखा गया था। उन्हें ये पता नहीं था कि ईदी अमीन उस समय युगांडा में नहीं थे। ऐसे में इजराइल के प्लान का खुलासा हो गया, लेकिन बिल्डिंग की पूरी जानकारी होने के कारण कमांडों तेजी से बंधकों के पास पहुंच गए। उन्होने हिब्रू भाषा में सभी बंधकों को लेट जाने को कहा और वहां फायरिंग शुरू कर दी । इस कार्रवाई में सभी सात अपहरणकर्ता और युगांडा सेना के लगभग 50 जवान मारे गए। जबकि इजराइल के 3 बंधकों की मौत हुई। आते समय इजराइली कमांडो ने एयरपोर्ट पर खड़े युगांडा के सभी फाइटर प्लेन को बम से उड़ा दिया।
अपने मुल्क के 100 से ज्यादा यहूदियों को बचाने के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनाथन नेतन्याहू की मौत हो गई। दूसरे देश में इस सफल ऑपरेशन के बाद मोसाद और इजराइली फौज की जमकर तारीफ हुई। पूरे ऑपरेशन में सिर्फ एक सैनिक को अपनी जान गंवानी पड़ी।

28 सितंबर, सोमवार
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