क्राइम ब्रांच के कुछ पुलिसकर्मीयो से सबसे ज्यादा दुखी डालर मार्केट और नावेल्टी के दुकानदार थे जो अनजाने में फोन खरीद लेते थे।
आमजन की सुविधा के लिए बनाई हेल्पलाइन भी क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मियों के लिए शुभ-लाभ का माध्यम बन गई। हेल्पलाइन में काम करने वाला स्टाफ न सिर्फ शुभ-लाभ करता, बल्कि देने और लेने वालों पर एहसान भी कर रहा था। डीसीपी (अपराध) निमिष अग्रवाल के कानों तक खबर पहुंची तो रवानगी कर दी। ताजा मामला गुम-चोरी मोबाइल ढूंढने वाली शाखा का है। सिटीजन काप पर आई शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए ट्रेंड पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई थी। तकनीकी कार्यों में दक्ष पुलिसकर्मी शिकायतकर्ता का फोन ट्रेस कर सबसे पहले उस व्यक्ति को बुलाते, जिसके पास फोन मिलता। बेचारे को फोन तो जमा करवाना पड़ता, चोरी और लूट में न फंसने की एवज में अफसर की सेवा भी करता। सबसे ज्यादा दुखी डालर मार्केट और नावेल्टी के दुकानदार थे जो अनजाने में फोन खरीद लेते थे। डीसीपी ने शिकायत मिलने पर कुछ को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
मुखबिर से गच्चा खा गए क्राइम ब्रांच वाले
अवैध वसूली के लिए बदनाम क्राइम ब्रांच खुद ही ठगी का शिकार हो गई। इस बार तेज तर्रार पुलिसवालों को मुखबिर ही गच्चा दे गया। पुलिसवालों का चेहरा दिखाकर व्यापारी से करोड़ों रुपये ले गया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) राजेश हिंगणकर अब पुलिसवालों की जांच करवा रहे हैं। सोना-चांदी व्यापारी ने शिकायत में कहा कि कि पुलिसवालों ने उससे 40 लाख रुपये ले लिए। अफसरों ने मुलजिमों की तरह शिनाख्त करवाई और प्रधान आरक्षक लक्ष्मण सहित चार पुलिसवालों को पहचान लिया। लक्ष्मण को बुलाया तो पता चला असली खिलाड़ी तो उसका मुखबिर बबलू है जो उसकी टीम को आगे कर रुपये ले उड़ा। ड्रग्स और हथियारों की खेप पकड़वा चुके बबलू ने इस बार भी बड़ा काम करवाने का आश्वासन दिया था। लक्ष्मण ने तीन पुलिसवालों को उसके कहे स्थान पर भेज दिया। पुलिसकर्मी तो लौट आए लेकिन बबलू ने धमका कर रुपये ले लिए।
