
जिला एवं सत्र न्यायालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला जारी किया है। दरअसल, वाहन मालिक ने बीमा कंपनी से पॉलिसी ली थी। प्रीमियम के लिए चेक जारी किया था। चेक बाउंस हो जाने पर बीमा कंपनी ने इसकी सूचना आरटीओ और वाहन मालिक को भेजी थी, लेकिन इसकी तामीली के संबंध में कोई प्रमाण हासिल नहीं किया। इस तरह के मामलों में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए कंपनी को भुगतान किए जाने के आदेश दिए हैं।
छत्रीपुरा निवासी जसवंत सिंह इंदौर से उदयपुर जा रहे थे। वह खुद भी एक मिनी ट्रक में सवार थे। मिनी ट्रक को एक ट्राले ने टक्कर मार दी थी। इसमें जसवंत सिंह को गंभीर चोट आई थी। उनकी तरफ से अधिवक्ता राजेश खंडेलवाल ने जिला कोर्ट में क्लेम के लिए परिवाद दायर किया। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि जिस गाड़ी ने टक्कर मारी उसकी पॉलिसी के लिए जारी किया गया चेक बाउंस हो गया। पॉलिसी एक्टिव ही नहीं थी। आरटीओ, वाहन मालिक को भी चेक बाउंस होने, पॉलिसी एक्टिव नहीं होने की सूचना दी गई थी।
