
स्कूली वाहनों को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस अब आईटीएमएस कैमरों से नजर रखेगी। हर महीने ट्रैफिक पुलिस इसका डेटा निकालेगी। जो भी स्कूली वाहन चालक दो बार से ज्यादा ट्रैफिक नियम तोड़ता पाया जाता है तो उसके प्रबंधन को ऐसे ड्राइवरों को हटना पड़ेगा।
एसीपी ट्रैफिक मनोज खत्री ने बताया, जिन स्कूलों में निजी वाहनों से बच्चे आते हैं, उसके प्रबंधन को संबंधित बच्चों की क्लास टीचर को जिम्मेदारी देनी होगी। वह बच्चों से अपडेट लेंगे कि वे कौन से वाहन से आते हैं। चालक कौन है और कितने बच्चों को लाते हैं।
फिर टीचर निजी वाहनों से आने वाले बच्चों का वाट्सएप ग्रुप बनाकर पैरेंट्स को जोड़ें और थोड़ी भी लापरवाही पर पैरेंट्स व टीचर बच्चों की सुरक्षा पर लापरवाह चालकों की जानकारी पुलिस को दें।
कैमरों का एक्सेस पैरेंट्स के पास हो
ड्राइवर मोबाइल पर बात नहीं करेगा। अभिभावक परिचालक या बस में अटैंडर्स के मोबाइल नंबरों से बसों की स्थिति का जायजा लेंगे।
स्कूल प्रबंधन को बसों के निकलने के दौरान ड्राइवरों की ब्रिथ एनालाइजर से जांच करना होगी।
वाहन चालक पर बीएनएस के तहत कोई भी मामला दर्ज है तो वह स्कूल बस नहीं चलाएगा।
स्कूली वाहनों का फिटनेस चेक करने के लिए एक सेल प्रबंधन को रखना होगी। इस सेल का काम होगा कि वह बस स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड किट और सीसीटीवी कैमरों की जानकारी ले। बसों का मेंटेनेंस, परमिट, इंश्योरेंस और फिटनेस भी देखे।
स्कूली वाहन में सीसीटीवी कैमर जरूरी हों। इनका एक्सेस एक वाट्सएप ग्रुप बनाकर स्कूल प्रबंधन, ट्रैफिक इंचार्ज और बच्चों के पैरेंट्स के पास हो।
वाहन चालकों के लिए निर्देश
वाहन का रजिस्ट्रेशन, बीमा, प्रदूषण चेक प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य रखें।
वाहन चलाने से पहले इंजन ऑइल, ब्रेक, इंडिकेटर्स, हॉर्न, हेडलाइट, टायर प्रेशर चेक करें।
स्कूली वाहन चलाने के दौरान तंबाकू, गुटखा या सिगरेट-पाउच का उपयोग न करें।
स्कूली वाहनों से सड़क पर चलने के दौरान रेस न लगाएं। पैदल यात्री को प्राथमिकता दें।
धुंध, कोहरे की स्थिति में लाइट, इंडीकेटर ऑन कर वाहन चलाएं।
