
एक सप्ताह में दूसरी बार बड़गोंदा में जंगल से सटे एक इलाके में बाघ देखा गया है। रामपाल नामक ग्रामीण तालाब के पास से होते हुए जा रहा था, तभी झाड़ियों में बाघ की पूंछ घूमती हुई दिखी। करीब 50 फीट की दूरी पर बाघ बैठा दिखा तो रामपाल के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। रामपाल ने अपनी बाइक छोड़कर दौड़ लगा दी। फिर करीब 5 से 6 घंटे बाद अपने कुछ साथियों के साथ उस जगह गया और बाइक लेकर आया। जहां बाघ बैठा था, वहां उसके पंजों के तीन निशान भी मिले हैं। उधर, बड़गोंदा में विभाग की नर्सरी में दर्जनों मजदूर काम करते हैं। यहां पर बारिश की वजह से 5 से 6 फीट की घास उग आई है। हर साल झाड़ियों को कटवाया जाता है, लेकिन इस बार नर्सरी के एसडीओ ने यह काम नहीं करवाया है। यहां भी बाघ आने का खतरा है।
