
नशे के सौदागर मोटे किराए का लालच देकर दवा कंपनियों में जगह किराए पर ले रहे हैं। इनकी कोशिश रहती है कि दवा निर्माण की आड़ में उनका धंधा भी छिपा रहे। केंद्रीय एजेंसियां ऐसे रैकेट को पकड़ रही हैं। दवा निर्माण के लाइसेंस के लिए अनिवार्य शर्त है कि दवा फैक्ट्री के परिसर में किसी अन्य गतिविधि को नहीं चलाया जा सकता।
नियमानुसार दवा फैक्ट्री की जगह किराए पर ही नहीं दी जा सकती।
इंदौर में काला धंधा करने वालों को कंपनियों ने बनाया किराएदार।
नशे के धंधेबाजों को किराए की जगह देने वालों को बचा लिया गया।
सरकारी जमीन पर चल रही दवा फैक्ट्रियों के किराएदार नशीली ड्रग्स बनाने वाले निकल रहे हैं। काले धंधे वालों को किराएदार बनाने के बाद भी इन कंपनियों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। जबकि नियम तोड़कर सरकारी जमीन को ही नशे के लिए किराए पर दे दिया गया। किराएनामे की आड़ लेकर दवा कंपनी में तोड़े गए कानून पर औषधि प्रशासन ने आंख मूंद ली है। अपनी जमीन पर चल रहे नशा उद्योग पर उद्योग विभाग को भी परवाह नहीं है। इंदौर से लेकर मेघनगर तक प्रदेश में यही किस्सा दोहराया जा रहा है।
डीआरआई ने इंदौर में नशीली दवा का कारखाना पकड़ा था
डीआरआई ने 2018 में इंदौर की दवा कंपनी के परिसर में घातक नशीली दवा फेंटानिल हाइड्रोक्लोराइड के निर्माण का कारखाना पकड़ा था। पोलोग्राउंड औद्योगिक क्षेत्र की दवा कंपनी आर्या फार्मेसी के परिसर में ही ये नशीली दवा का कारखाना चल रहा था। देश में फेंटानिल का कारखाना पकड़ने का यह पहला मामला था।
कंपनी के किराएदार बनकर नशा बनाने वाले डॉक्टर मोहम्मद सिद्दिकी के साथ मनु गुप्ता और मैक्सिकन नागरिक जार्ज सालिक गिरफ्तार हुए और सजा भी हो गई। इन्हें जगह देने वाली दवा फैक्ट्री को कार्रवाई से बचा लिया गया।
नियमानुसार दवा फैक्ट्री की जगह किराए पर ही नहीं दी जा सकती थी। इसी तरह बीते सप्ताह मेघनगर फार्मा की आड़ में सिंथेटिक ड्रग निर्माण का कारखाना पकड़ा गया। यहां भी अब तक सिर्फ किराएदार ही कानून के चंगुल में फंसे हैं।
नियम तोड़े
संचालक स्वीकृत लेआउट को बदलकर किराएदार रख सकता है। ऐसी स्थिति में दवा फैक्ट्री का निर्माण लाइसेंस रद कर दिया जाता है। दूसरा नियम उद्योग विभाग का है। सरकारी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग विभाग शासन की जमीन उद्योगों को लीज पर देता है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयां खुद शासन की किराएदार होती हैं और वे दूसरों को किराएदार नहीं रख सकतीं। इंदौर की आर्या फार्मेसी और झाबुआ क्षेत्र की मेघनगर फार्मा दोनों ही सरकारी औद्योगिक क्षेत्र की जमीन पर चल रही हैं।
