
इंदौर शहर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उस तेजी के साथ यहां स्वास्थ्य सेवाएं विकसित नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के पीसी सेठी अस्पताल में बच्चों के लिए सिर्फ 7 बेड है। गंभीर मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाए तो परेशानी बढ़ सकती है।
पीडियाट्रिक वार्ड में तीन वर्षो से लगा ताला।
यहां बच्चों के लिए तैयार किए गए थे 70 बेड।
चाचा नेहरू अस्पताल में सिर्फ 20 ICU बेड।
इंदौर। शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बड़े-बड़े वादे तो किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यदि बड़ी संख्या में इलाज के लिए मरीज आ जाएं तो उन्हें इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है। शहर की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उस तेजी से शासकीय अस्पतालों में बेड़ की संख्या नहीं बढ़ रही है। इंदौर में लाखों की संख्या में बच्चे हैं, लेकिन उनकी देखभाल के लिए शासकीय अस्पतालों में सिर्फ 27 आइसीयू बेड की उपलब्ध है। इनमें से एमजीएम मेडिकल कालेज के चाचा नेहरू अस्पताल में 20 आईसीयू बेड है।
पीसी सेठी अस्पताल में सिर्फ 7 बेड
वहीं स्वास्थ्य विभाग के पीसी सेठी अस्पताल में बच्चों के लिए सिर्फ सात बेड है। ऐसे में यदि गंभीर मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाएं तो उन्हें उपचार मिलने में समस्या आ सकती है।
हालांकि कम बेड संख्या के बाद भी इन अस्पतालों में डॉक्टरों की टीम बेहतर उपचार दे रही है, लेकिन शहर की जरूरत को देखते हुए इन्हें बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि यहां सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि संभाग भर के जिले धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी से मरीज इलाज करवाने के लिए आते हैं।
हाल ही में युगपुरुष आश्रम से करीब 40 बच्चों को एक साथ इलाज के लिए लाया गया था, हालांकि सभी को आईसीयू में रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी, लेकिन यदि जरूरत पड़ती तो क्या होता।
70 बेड के पीडियाट्रिक वार्ड में लगा ताला
स्वास्थ्य विभाग के हुकुमचंद पाली क्लीनिक में कोरोना के समय 70 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड बनाया गया था, लेकिन करीब 3 वर्षो से यहां ताले लगे हुए है। इसके खुलवाने के लिए हमेशा सिर्फ बैठक और भोपाल से पत्राचार ही किए गए हैं, लेकिन इसे खुलवाने को लेकर जिम्मेदार दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं।
यहां पीडियाट्रिक वार्ड में आधुनिक उपकरण रखे हुए है, जिससे गंभीर बच्चों का भी इलाज किया जा सकता है। यदि वार्ड शुरू हो जाएं तो इसका लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों को दिया जा सकता है।
कई बार मरीजों को जाना पड़ता है निजी अस्पताल
बता दें कि शहर के शासकीय अस्पतालों में कई बार दूर-दूर से आने वाले मरीजों को पीडियाट्रिक आईसीयू वार्ड में बेड ही नहीं मिलते हैं। ऐसे में कई बार मरीजों की संख्या बढ़ जाने के कारण उन्हें निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता है। यदि स्वास्थ्य विभाग इसे शुरू करवा दें तो शहर में पीडियाट्रिक वार्ड की संख्या बढ़कर करीब 100 हो जाएगी।
किस अस्पताल में कितने पीडियाट्रिक बेड
चाचा नेहरू अस्पताल- 100 बेड
चाचा नेहरू आईसीयू- 20 बेड
एमवायएच चेस्ट वार्ड- 100 बेड
एमटीएच अस्पताल न्यू बोर्न यूनिट- 100 बेड
पीसी सेठी अस्पताल – 40 बेड
पीसी सेठी एनआइसीयू- 20 बेड
पीसी सेठी एनएचडीयू- 7 बेड
पीसी सेठी पीडियाट्रिक आईसीयू- 7 बेड
हमने हुकुमचंद अस्पताल में कोरोना के समय जरूरत को देखते हुए पीडियाट्रिक वार्ड शुरू किया था। अब इसे चलाने के लिए स्टाफ की आवश्यकता है, जिसे लेकर हम भोपाल में पत्र लिख चुके हैं। वहां से स्टाफ की नियुक्ति के आदेश के बाद हम इसे शुरू कर देंगे। – डॉ. बीएस सैत्या, सीएमएचओ

