
- निगम ने आर्थिक हानि पहुंचाने वाली 5 फर्म के विरूद्ध कराई एफआईआर दर्ज
- लेखा विभाग में भुगतान हेतु भेजे प्रकरण की जांच से हुआ खुलासा
- फर्जी हस्ताक्षर एवं कुटरचित दस्तावेज के माध्यम से तैयार किये पे ऑर्डर एवं भुगतान हेतु भेजा लेखा शाखा
इंदौर दिनांक 17 अप्रैल 2024। निगम के लेखा विभाग में विगत दिनो डेªनेज एवं जलयंत्रालय विभाग से 5 फर्म के 20 पे ऑर्डर ऑडिट पश्चात लेखा शाखा में प्रस्तुत किये गये थे। लेखा शाखा में प्राप्त उक्त पे ऑर्डर की जांच करने पर उक्त पे ऑर्डर में अधिक राशि के होने एवं मात्र 5 फर्म के होने से देयको के संबंध में शंका उत्पन्न हुई। उक्त प्रकरण के संबंध में लेखा शाखा द्वारा तत्काल उपस्थिति से आयुक्त को अवगत कराते हुए, प्रकरण प्रस्तुत किया गया।
आयुक्त श्री शिवम वर्मा द्वारा अपर आयुक्त वित्त और अपर आयुक्त ड्रेनेज एवं विभाग प्रमुख डेªनेज एवं जलयंत्रालय विभाग से उक्त प्रकरण को परीक्षण कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया। डेªनेज विभाग द्वारा परीक्षण में पाया गया कि उक्त देयक फर्जी हस्ताक्षर एवं कुटरीचित तरीके से तैयार किये गये है, जिनका डेªनेज विभाग में कोई रेकार्ड नही है।
अपर आयुक्त वित्त तथा निगम लेखा शाखा विभाग की सतर्कता से निगम से होने वाला भुगतान रोका गया और एक और निगम को आर्थिक हानि से बचाया गया तो दूसरी और निगम को आर्थिक हानि पहुंचाने वाले तथा कुटरचित दस्तावेज तैयार करने वाले अपचारियों की पहचान की गई ।
आयुक्त श्री शिवम वर्मा द्वारा उक्त प्रकरण में 5 फर्म के संबंधित संचालको के विरूद्ध थाना एमजी रोड में प्राथमिकी दर्ज कराये जाने हेतु कार्यपालन यंत्री डेªनेज, सहायक आयुक्त विधि, सहायक लेखापाल एवं आईटी के विशेषज्ञ की उपस्थिति में टीम गठित की गई। उपरोक्त प्रकरण में आयुक्त श्री वर्मा के निर्देशानुसार गठित टीम द्वारा थाना एमजी रोड में 5 फर्म जिनमें मेसर्स नींव कंस्ट्रक्शन प्रोयरायटर मोहम्मद साजिद, मेसर्स ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्रोयरायटर मोहम्मद सिदिकी, मेसर्स किंग कंस्ट्रक्शन प्रोपरायटर मो. जाकिर निवासी 147 मदीना नगर एवं मेसर्स क्षितिज इंटरप्राइजेस प्रोपरायटर श्रीमती रेणु वडेरा निवासी 6 आशीष नगर एवं मेसर्स जहान्वी इंटरप्राइजेस प्रोपरायटर राहुल वडेरा निवासी 12 आशीष नगर इंदौर पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
विदित हो कि निगम के 5 ठेकेदारों द्वारा 20 ड्रेनेज कार्यों के फर्जी वर्क आर्डर अनुबंध मेजरमेंट बुक बिल पे ऑर्डर आदि दस्तावेज तैयार कर ऑडिट विभाग में प्रस्तुत किए गए एवं ऑडिट उपरांत उक्त पे ऑर्डर लगभग राशि रुपए 28 करोड़ के निगम के लेखा शाखा में आवक कराए गए उक्त पे ऑर्डर के भुगतान की कार्रवाई से पूर्व लेखा शाखा में देयको का परीक्षण लेखा विभाग द्वारा किया गया, शाखा में प्रस्तुत इतनी बड़ी राशि का भुगतान 5 एजेंसियों को किया जाना होने पर अपर आयुक्त वित्त श्री देवधर दरवाई तथा लेखा शाखा के कर्मचारी एवं अधिकारियों को देयको के संबंध में शंका उत्पन्न होने पर प्रकरण अपर आयुक्त वित्त द्वारा तत्कालीन निगम आयुक्त को प्रस्तुत किया गया। निगम आयुक्त द्वारा ड्रेनेज विभाग के अपर आयुक्त एवं विभाग प्रमुख से परीक्षण कराए जाने के निर्देश दिए गए।
तत्कालीन आयुक्त महोदय के निर्देशानुसार लेखा विभाग से ड्रेनेज विभाग में प्राप्त उक्त 20 देयक पे-ऑर्डर के साथ मेजरमेंट बुक, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र, रॉयल्टी का पत्र, लेवल शीट, किए गए कार्य के नक्शे आदि दस्तावेज परीक्षण एवं सत्यापन हेतु भेजे गए। ड्रेनेज विभाग में उक्त देयको के साथ संलग्न अनुबंध पत्र के आधार पर अनुबंध क्रमांक दिनांक का मिलान किया गया, उक्त 05े फर्माे के नाम से कोई कार्यादेश जारी होना नहीं पाया गया। उक्त 05 फर्मों के जो 20 देयक ड्रेनेज शाखा में आवक क्रमांक से आवक होना दर्शित हुआ उसका परीक्षण करने पर पाया गया कि इस प्रकार के कोई देयक ड्रेनेज शाखा में आवक नहीं हुए हैं और इसी प्रकार देयक को लेखा शाखा में भेजे जाने हेतु जावक क्रमांक दिनांक का भी परीक्षण करने पर पाया गया है कि ड्रेनेज शाखा से इस प्रकार से कोई भी देयक जावक रजिस्टर एवं डाक बुक से नहीं भेजे गए हैं। साथ ही जांच मे यह भी पाया गया कि अनुबंध पर अंकित निविदा दिनांक को उक्त कार्य हेतु निविदा जारी होना नहीं पाया गया तथा समान नाम के कार्यों की निविदा विज्ञप्ति अन्य दिनांक में जारी हुई है एवं अनुमान पत्रक की राशि उसमें तुलनात्मक बहुत कम है।
उपरोक्त जाचं में समान नाम के कार्यों की निविदा में अन्य फर्म/ठेकेदार द्वारा निविदा प्रस्तुत होना पाया गया तथा उन्ही के कार्य स्वीकृत किये गये होकर, अनुबंध किये गये जाना पाया गया। अनुबंधित फर्म/ठेकेदार द्वारा झोनल कार्यालय के माध्यम से कुछ कार्य संपादित किए गए, कुछ कार्य शेष हैं एवं कुछ कार्य अमृत योजना में शामिल होने से निरस्त किए गए। इस प्रकार पूर्ण रूप से सत्यापन एवं प्रशिक्षण के उपरांत यह निष्कर्ष आया कि लेखा शाखा में 5 फर्मा द्वारा प्रस्तुत 20 पे ऑर्डर, नोटशीट व अन्य सभी दस्तावेज में फर्जी हस्ताक्षर एवं कुटरचित तरीके से तैयार किए गए हैं।
डेªनेज एवं जलयंत्रालय विभाग द्वारा उक्त प्रकरण की जांच से नोटशीट लेखा शाखा को प्रेषित की गई, अपर आयुक्त वित्त द्वारा नोटशीट पर आगामी कार्यवाही हेतु आयुक्त महोदय को प्रकरण प्रस्तुत किया गया। इस पर आयुक्त द्वारा 05 फर्म के संचालकों के विरूद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज किये जाने एवं प्रकरण में संलिप्त कर्मचारियों/अधिकारियों की विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विदित हो कि आयुक्त श्री वर्मा द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए की निगम को आर्थिक हानि पहुंचाने वाले कोई भी फॉर्म ,एजेंसी अथवा जो भी संबंधित होगा उसके विरुद्ध नियम अनुसार कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जावेगी

