
विकास को जानने वाले और बैचमेट ने भी दबी जुबान से अफसरों को वास्तविकता बताई लेकिन इसके बाद बयानबाजी बंद करवा दी गई।
एसआइ विकास पाटिल खुदकुशी केस को पुलिस ही दबाना चाहती है। बड़े अफसर स्वयं नहीं चाहते कि खुदकुशी की वजह सार्वजनिक हो। लिहाजा कथन और जांच के बहाने इस केस को आहिस्ता-आहिस्ता ठंडा किया जा रहा है। विजयनगर थाने में पदस्थ रहे 2016 बैच के सब इंस्पेक्टर (एसआइ) विकास पाटिल ने 2 दिसंबर को 15वीं बटालियन स्थित हाईराइज इमारत में फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली थी। घटना के कुछ ही देर बाद अफसरों ने खबर फैलाई कि विकास ने पारिवारिक कारणों से जान दी है। दूसरे दिन उनकी पत्नी ने यह कहते हुए अफसरों का मुंह बंद कर दिया कि उनकी मौत के जिम्मेदार अफसर हैं। घटना के दो दिन पूर्व सार्वजनिक रूप से अपशब्द बोलने पर विकास इतने दुखी हुए कि उसके बाद थाने नहीं गए। विकास को जानने वाले और बैचमेट ने भी दबी जुबान से अफसरों को वास्तविकता बताई लेकिन इसके बाद बयानबाजी बंद करवा दी गई।
