
- परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अपनी मांगें नहीं माने जाने के कारण अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए। आरटीओ में प्रभावित होंगे कई कार्य।
- सोमवार को मध्य प्रदेश के सभी परिवहन कार्यालय बंद रहे और कोई काम नहीं हुआ।
रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस जैसे जरूरी काम के लिए आवेदन होते रहे परेशान।
मांगों को लेकर पहले सरकार ने दिया था आश्वासन, लेकिन मांगें आज तक नहीं मानी।
मध्यप्रदेश के सभी परिवहन कार्यालयों में सोमवार को काम नहीं हुआ और कार्यालय बंद रहे। परिवहन अधिकारियों और कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से आरटीओ में काम प्रभावित रहा। रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस जैसे जरूरी काम भी नहीं हो सके। इससे आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इंदौर आरटीओ कार्यालय में भी काम बंद रहा और हजारों आवेदकों के काम नहीं हो सके।
मध्य प्रदेश परिवहन (राजपत्रित) अधिकारी संगठन के आह्वान पर प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालय में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अवकाश पर चले गए। प्रदेश के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने से निर्णय से इंदौर के नायता मुंडला स्थित परिवहन कार्यालय में रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, नामांतरण, लाइसेंस जैसे कार्य प्रभावित रहे।
मांगों का निराकरण नहीं होने तक जारी रहेगी हड़ताल
हड़ताल को लेकर अधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से मूलभूत मांगें शासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन उन पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। परिवहन अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया था। तब 15 दिन में मांगे पूरी करने का आश्वासन मिला था। अब तक मांगें पूरी नहीं होने पर हड़ताल शुरू की गई है। मांगों पर निर्णय नहीं होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
हजारों फाइलें अटकी
परिवहन विभाग में प्रतिदिन करीब 500 नए वाहनों के पंजीयन होते हैं, जबकि करीब 400 पुराने वाहनों के पंजीयन, 600 लाइसेंस और करीब 100 फिटनेस के आवेदन आते हैं। कमर्शियल वाहनों के परमिट, बसों के परमिट जैसे आवेदन भी प्रतिदिन आते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के नहीं आने से फाइलों के अप्रूवल सहित अन्य कार्य नहीं हो सके। हड़ताल लंबी चलती है, तो आवेदकों को परेशानी से गुजरना पड़ेगा। पंजीयन और परमिट जैसे काम नहीं होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इन मांगों को लेकर की जा रही हड़ताल
- वेतन विसंगति दूर करना
- केडर रिव्यू करना
- क्रमोन्नति व्यवस्था लागू करना
- दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति बंद करना
- जिला स्तर पर प्रवर्तन अमला देना
- बस दुर्घटना में आरटीओ को उत्तरदायी ना ठहराना
- दूसरे अन्य विभागीय कार्यों में आरटीओ को ना लगाना

