
ओंकारेश्वर में नागर घाट पास नाव के इंजन में आई खराबी और चट्टान से टकराकर पलट गई।
ओंकारेश्व में पलटी नाव तो दूसरे नाविक तुरंत पहुंचे उसमें सवार लोगों को बचाने।
गोताखोर, पुलिसकर्मी और नाविकों ने सभी को सुरक्षित बचा लिया।ओंकारेश्वर में इसके पूर्व भी नाव पलटने के कई हादसे हो चुके हैं।नाविकों द्वारा नियम को नजरअंदाज कर नाव का संचालन मनमर्जी से किया जा रहा है।
तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 15 अगस्त को अवकाश की वजह से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान नागर घाट के समीप एक नाव संतुलन बिगड़ने से पलट गई। इसमें उज्जैन और महू के एक ही परिवार के करीब 10 सदस्य सवार थे।
चट्टान से टकराई नाव
नाव पलटे ही वहां मौजूद गोताखोर, पुलिसकर्मी और नाविकों ने सभी को सुरक्षित बचा लिया। बताया जाता है कि उस स्थान पर पानी कम होने से बड़ा हादसा टल गया। नाव को घाट की ओर ले जाने के दौरान इंजन में खराबी आने से वह एक चट्टान से टकराने पर क्षतिग्रस्त हो गई। इससे नाव में पानी भरने से संतुलन बिगड़ गया था।
नाव में महू व इंदौर के दीपांशु पाटीदार, अभय पाटीदार सहित रिश्तेदार सवार थे। मांधाता थाने की आरक्षक अमित मिश्रा ने बताया कि नाव में करीब 10 यात्री सवार थे। सभी को सुरक्षित बचा लिया गया है। कुछ समय बाद सभी अपने घर के लिए रवाना हो गए थे।
पहले भी हो चुके हैं नाव पलटने के हादसे
विदित हो कि ओंकारेश्वर में इसके पूर्व भी नाव पलटने के कई हादसे हो चुके हैं। इसे देखते हुए प्रशासन द्वारा विगत दिनों नाव पलटने से एक नाबालिक और एक श्रद्धालु की मौत होने पर नाव संचालन काफी दिनों तक बंद रखा था।
वहीं नाव संचालन के लिए यात्रियों की संख्या का निर्धारण, लाइफ जैकेट की अनिवार्यता, वैध लाइसेंस, घाटों पर नावों को व्यवस्थित खड़े रखने और शाम छह बजे बाद नाव का संचालन नहीं करने सहित विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। भीड़ के दौरान कई नाविकों द्वारा नियम को नजरअंदाज कर नाव का संचालन मनमर्जी से किया जा रहा है। जो हादसों की वजह बनती है।

