
पाकिस्तान में 9 मई को हुई पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद वहां सियासी हंगामा जारी है। इमरान खान ने सोमवार को अपनी पत्नी बुशरा बेगम की गिरफ्तारी की आशंका जाहिर की है। सोशल मीडिया हैंडल पर खान ने देर रात लिखा कि सरकार बुशरा बेगम को गिरफ्तार कर मुझे नीचा दिखाना चाहती है।
खान ने नवाज शरीफ का नाम लिए बैगर कहा – मेरे लिए ‘लंदन प्लान’ बन चुका है। राजद्रोह का इस्तेमाल कर सरकार मुझे 10 साल के लिए जेल भेजने की तैयारी कर रही है। वहीं इमरान खान को रिहाई देने पर शाहबाज सरकार सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आज बड़ा धरना देने जा रही है। इस पर खान ने लिखा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाना चाहती है ताकि चीफ जस्टिस संविधान के मुताबिक फैसले न कर पाएं।

सुप्रीम कोर्ट के सामने धरने पर बैठेगी शाहबाज सरकार
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से मिली रिहाई के खिलाफ सरकार आर-पार के मूड में आ गई है। पीएम शाहबाज शरीफ के नेतृत्व वाला सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने सुप्रीम कोर्ट के सामने धरने का ऐलान किया है।
पीडीएम प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका इमरान खान का ‘पक्ष’ ले रही है। धरना मुख्य न्यायाधीश उमर अता बांदियाल के इस्तीफा देने तक जारी रहेगा। इस बीच, देर रात गृहमंत्री राना सनाउल्ला ने मौलाना रहमान से मुलाकात कर धरना स्थल में बदलाव करने की गुजारिश की है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की वरिष्ठ उपाध्यक्ष मरियम नवाज इस्लामाबाद पहुंच चुकी हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो का आरोप है कि न्यायापालिका जरूरत से ज्यादा सियासी हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायपालिका ‘टाइगर फोर्स’ बनने से बचे। बिलावल ने चेतावनी दी है कि न्याय नहीं मिला तो उनकी पार्टी इसे छीन लेगी। रावलपिंडी में सेना मुख्यालय की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर सेना-समर्थक बैनर लगे हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में पाकिस्तान चुनाव आयोग की याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी। याचिका में आयोग ने कहा है कि चुनाव कराने के आदेश पर शीर्ष अदालत पुनर्विचार करे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 14 मई को पंजाब विधानसभा के चुनाव कराए जाएं। उधर, पीटीआई ने इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ पाक रेंजर्स पर अपहरण का केस दर्ज कराने का ऐलान किया है।

26 साल बाद ऐसे हालात
पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ धरने के हालात 26 साल बाद बन रहे हैं। आखिरी बार नवंबर 1997 में पीएमएल-एन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट पर हमला किया था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ एक मामले की सुनवाई चल रही थी।
उस वक्त चीफ जस्टिस सज्जाद अली शाह और राष्ट्रपति फारूक खान लेघारी के साथ विवाद चल रहा था। भीड़ के हमले के चलते न्यायाधीशों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा था। डराने-धमकाने के माहौल में अदालत में मामला समाप्त हो गया और अंततः मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति को इस्तीफा देना पड़ा।
पाकिस्तानी सेना इतिहास में पहली बार तीखी आलोचना का सामना कर रही
पाकिस्तानी सेना की स्थिति इधर कुुंआ, उधर खाई जैसी है। एक ओर, आतंकवाद चुनौती बन गया है। आतंकियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों यानी सेना पर अपने हमले बढ़ा दिए हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक मामलों में दखलंदाजी के लिए उस पर इमरान और उनके समर्थकों की ओर से लगातार शाब्दिक हमले हो रहे हैं। ऐसी आलोचना इतिहास में कभी नहीं हुई है।
दो धड़े: एक तरफ सरकार और पाकिस्तानी सेना तो दूसरी तरफ इमरान-न्यायपालिका
पाकिस्तान राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा का संकट झेल रहा है। सियासी मोर्च पर सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना, अपने पूर्ववर्ती जनरल को फॉलो करते हुए गठबंधन सरकार के साथ है।
दूसरी ओर, नवाज शरीफ की तरह इमरान ने सत्ता में लौटने के लिए सेना के साथ रिश्ते सुधारने का इंतजार करने के बजाय सीधी टक्कर दी। साथ ही सरकार को दो टूक कह रहे हैं। ये साफ है कि एक ओर सरकार और सेना है, दूसरी ओर इमरान और न्यायपालिका।

