भाजपा के पूर्व मंत्री व पिछड़ा वर्ग प्रदेश अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन अपने एक दिवसीय दौरे पर इंदौर पहुंचे जहां इंदौर के रेसीडेंसी कोठी पर उन्होंने पत्रकार वार्ता आयोजित की जिसमें उन्होंने पिछड़ा वर्ग को लेकर बनाए गए कई विषयों पर मीडिया से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों स्थानीय नेताओं के और पंचायती राज के चुनाव न्यायालय में याचिकाओं के कारण लंबित हैं और विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसमें मुख्यमंत्री ने रखा था और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने भी सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया इस इस प्रस्ताव के मंशा यह थी कि ओबीसी के बिना चुनाव नहीं होंगे उन्होंने कहा कि 2021 में भाजपा के पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री ने की थी और 17 दिनों में आयोग बनकर तैयार हो गया उन्होंने कहा कि ओबीसी के मतदाता 2011 के जनगणना के आधार पर आंकड़े और संख्या वार्ड से चाहे पंचायत परिषद या नगर निगम के जिले में कौन से जाति है और ओबीसी में कितने लोग आते है इसकी सूची भी प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध है उसको सर्कुलर किया और रोजगार सहायक पंचायत सचिव पटवारी बीएलओ जो अमला वोटर्स बनाने में लगता है उनका सहयोग लेकर ओबीसी के मतदाता की सूची बनाई,जिसमे प्रत्येक वार्ड में उसकी गणना की ओर परिणाम यह निकल कर आए किस 68.9 प्रतिशत ओबीसी मतदाता अर्बन रूलर मिलाकर औसत बालाघाट जिले का आया 68.2 सिवनी वही 46. 4 परसेंट छिंदवाड़ा रहा और अलीराजपुर झाबुआ का पॉइंट 4% और पूरे राज्य का 48 परसेंट मतदाता जनसंख्या का 50% ओबीसी वर्ग मध्य प्रदेश में है,, गौरीशंकर बिसेन ने कहां की यह प्रमाणित आंकड़े है जिसे जिला निर्वाचन कार्यालय के सर्टिफिकेट के आधार पर प्राप्त किया है। गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि इसको लेकर उच्च न्यायालय गए जहां पर उच्च न्यायालय में हमारी दलीलों को सुना गया और अपने तर्क वकीलों ने रखा और आयोग ने कहा कि चूंकि संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को जनसंख्या आधारित 22% st और 40% से 60% sc को है इसके बाद में इसके ऊपर किसी का हक बनता नहीं है और पिछड़ा वर्ग सिर्फ 14% का अधिकार है।
