स्टेटबार काउंसिल के नए अध्यक्ष प्रेम सिंह भदोरिया ने शुक्रवार को इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि अदालतों में मात्र 25 मामलों को भी सुने जाने के आदेश को वापस लेने के लिए काउंसिल ने चीफ जस्टिस से विनम्रता पूर्वक अपील की थी।
,चीफ जस्टिस ने काउंसिल के सदस्यों को दो बार संवाद के लिए बुलाया और आश्वस्त भी किया था किइस मामले में विचार करेंगे।लेकिन उन्होंने वकीलों के साथ विश्वासघात किया। उनके आग्रह पर हम एक बार कार्य से विरत रहने का फैसला वापस भी ले चुके थे। इसके बाद भी उन्होंने अपना आदेश वापस नहीं लिया। उनकी हट धर्मिता की वजह से ही वकील कार्य से विरत रहने को मजबूर हुए हैं। भदोरिया ने कहा कि 26 मार्च को काउंसिल की फिर से बैठक होगी।इस बीच रविवार को अवकाश है और चीफ जस्टिस ने हमें बुलाया तो फिर से बातचीत करने को तैयार हैं।इस तरह के फैसले से केवल वकील ही नहीं बल्कि जज भी परेशान हैं।
किसी भी पक्षकार को अपनी बात रखने के लिए समुचित समय दिए बिना प्रकरण का निपटारा कैसे किया जा सकता है। वकीलों का कार्य से विरत रहने का फैसला पक्षकार के ही लिए है।इस तरह 3 महीने में केस खत्म करने का फैसला पूरी तरह से गलत है।
