
आरोपियों व अपराधियों को लेकर भारत सरकार अंग्रेजों के 102 साल पुराने कानून को समाप्त कर नया कानून लाने जा रही है। इसमें आरोपियों-अपराधियों के रेटिना से लेकर फुटप्रिंट तक का रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि एक क्लिक पर पता किया जा सके पकड़ा गया व्यक्ति पहले भी कोई जुर्म कर चुका है क्या।
सरकार ने सोमवार को क्रिमिनल प्रोसिजर (आईडेन्टीफिकेशन) बिल 2022 लोकसभा में पेश किया। इसका मकसद दोषियों, अपराधियों व हिरासत में लिए गए आरोपियों की पहचान से जुड़ा हर रिकॉर्ड रखना है।
आपको बता दें अगर यह बिल पास हो जाता है और कानून बन जाता है तो ये दोषियों की पहचान से जुड़ा मौजूदा कानून द आइडेंटिफिकेशन ऑफ प्रिजनर्स एक्ट 1920 निरस्त हो जाएगा। मौजूदा कानून में फिंगर प्रिंट व फुट प्रिंट को लेने की ही इजाजत है जबकि वर्तमान टेक्नालाजी को देखे तो रेटिना, फोटो, फिंगर प्रिंट, हथेलियों के प्रिंट, फुटप्रिंट और बायोलॉजिकल सैंपल तक लेकर रखे जा सकते हैं। इसके साथ ही आरोपियों या दोषियों की हैंडराइटिंग व सिग्नेचर भी रिकॉर्ड में रखी जाएगी। गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने बताया कि अब न सिर्फ तकनीकी और वैज्ञानिक बदलाव हो रहे हैं बल्कि अपराध भी बढ़ रहे हैं इसलिए नया बिल लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नया कानून जांच एजेंसियों की न सिर्फ मदद करेगा बल्कि इससे कन्विक्शन (दोषसिद्धि) रेट भी बढ़ने की उम्मीद है।
