
उप्र की कोर्ट के फर्जी गिरफ्तारी वारंट के जरिए फरियादी को गिरफ्तार करवाने वाले आरोपित को सत्र न्यायालय ने तीन साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। आरोपित पर 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी ने आरोपित को बरी कर दिया था। फरियादी ने सत्र न्यायालय में अपील प्रस्तुत की जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए सजा सुनाई।
आरोपित का नाम अजय पुत्र श्यामसुंदर जाजोदिया है। उसने इंदौर निवासी कैलाश जिंदल के खिलाफ उप्र में एक केस दर्ज होना बताकर वहां की कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी वारंट जारी करवा दिया था। इस फर्जी आदेश को सही मानकर पुलिस ने इसकी तामिली करवाकर कैलाश को गिरफ्तार कर उप्र की देवरिया जिला कोर्ट में पेश करवा दिया। कोर्ट ने जब आदेश देखा तो कहा कि यह आदेश तो कभी न्यायालय से जारी ही नहीं हुआ। न्यायाधीश ने हस्ताक्षर भी फर्जी होने की बात कही। इस पर पुलिस ने कैलाश को वहीं छोड़ दिया था।
फर्जी आदेश से गिरफ्तार हुए कैलाश ने आरोपित अजय के खिलाफ झूठा वारंट जारी कराने के मामले में प्रकरण दर्ज कराया। इंदौर की जेएमएफसी कोर्ट ने आरोपित अजय को इस मामले में बरी कर दिया था। कैलाश ने इस पर एडवोकेट अजय उकास के माध्यम से सत्र न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई। एडवोकेट उकास ने बताया कि न्यायालय ने जेएमएफसी कोर्ट के फैसले को पलटते हुए आरोपित अजय को तीन साल कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
