जिस कोरोना काल में अपनों ने साथ छोड़ दिया। वहीं खाकी वर्दी पहने समाज का पहरेदार समाज सेवा के लिए अपने दोनों पैर क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी खड़ा है। हम बात कर रहे हैं इंदौर के उप निरीक्षक कैलाश चंदेल की जिन्होंने वर्दी का असली मानवीय चेहरा समाज के सामने लाकर रख दिया है।
हिम्मत है मर्दा तो मदद ए खुदा यह कहावत इंदौर के एक वर्दी वाले के के ऊपर सटीक साबित होती है क्योंकि यह वर्दीवाला हिम्मत का ऐसा जज्बा है कि दूसरों की सेवा के लिए फिर आ गए मैदान पकड़ लिया। हम बात कर रहे है उस कैलाश चंदेल की जो आरोपी भगवान चोटी को अकेले पकडक़र ले आए थे … जो चैंपियन ऑफ डे से भी सम्मानित है। मौत के मुंह से लौटकर सेवाएं दे रहे उप निरीक्षक चंदेल…
कोरोना की खौफनाक लहर के चलते लोग जहां अपनों को सहारा नहीं दे रहे हैं, वहीं खाकी का मानवीय चेहरा ऐसा भी सामने आया… जिनका एक पैर दुर्घटना में कट गया था और नकली पैर लगाना पड़ा, वहीं दूसरे एक्सीडेंट में क्षतिग्रस्त दूसरे पैर में रॉड लगी हुई है। फिर भी इंसानियत का ऐसा जज्बा कि डीआरपी लाइन में बने पुलिस कोविड सेंटर 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह बताते हैं चंदेल की जुबानी उनकी कहानी…
कोरोना का संक्रमण सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं रह गया है… इस वायरस ने अब इंसानियत, मानवीयता और तमाम रिश्ते-नातों को भी संक्रमित करके रख दिया है… ऐसे में एक सुखद मानवीय पहलू ये भी सामने आया… उप निरीक्षक कैलाश चंदेल जिनका 1999 में एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनका एक पैर कट गया था। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नकली पैर लगवाकर वापस ड्यूटी पर आ गए… इतना ही नहीं कई महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाया… इसके बाद 2012 में एक फिर काल की क्रूरता उनके सामने आ गई…इस बार उनका दूसरा पैर टूट गया, जिसमें रॉड लगानी पड़ी , लेकिन हिम्मत का ऐसा जज्बा कि वह फिर मैदान में आ गए । एक माह पहले जब उनसे पूछा गया कि डीआरपी लाइन में बने कोविड सेंटर (covid center) में वह ड्यूटी दे सकते हैं क्या? तो उन्होंने कहा कि दो बार मौत के मुंह से लौटा हूं…यह सब लोगों की सेवा का ही परिणाम है। फिर उन्हें यहां सुपर विजन का काम दिया गया जहां वे एक माह से 24 घंटे सेवा दे रहे हैं।

