एक और जहां देश में निजी करण को लेकर कर्मचारी परेशान होकर आंदोलन हड़ताल कर रहे हैं वही दूसरी ओर श्रम कानून में किए जा रहे हैं बदलाव को लेकर मजदूर और किसान मैं भी केंद्र और राज्य के सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त हो रहा है जिसके चलते आज सैकड़ों मजदूर किसान इंदौर के श्रम कार्यालय पर पहुंच कर ज्ञापन दिया साथ ही उन्होंने मांग की है कि अगर जल्द ही श्रम कानून रद्द नहीं किए जाएंगे तो किसान और मजदूर उग्र आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे जिसके जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होगी।
देशभर में कोरोना में लाखों नौकरियां चली गई और सरकार ने नए श्रम कानून को ला कर मजदूरों के कमर तोड़ने का काम कर रही है एनयूसीआई कम्युनिस्ट के प्रमोद नामदेव ने कहा कि पहले 8 घंटे ड्यूटी होती थी लेकिन इस नए श्रम कानून के चलते कर्मचारी को 12 घंटे कर दिया गया है इस नीति के कारण कई युवाओं को बेरोजगार कर दिया है साथ ही उन्होंने कहा कि कर्मचारी यूनियन भी नहीं बना सकता है इस कानून के तहत और ना ही अधिकारियों को अपनी मांगे रख सकता है वही सरकार लेबर कोर्ट को भी जल्द खत्म करने की तैयारी में है आज जो श्रम कानून बनाने की बात की जा रही है वह आम जनता और मजदूरों के खिलाफ आ रहा है। और जब किसान और मजदूर अपने अधिकार के लिए सड़कों पर उतरते हैं तो सरकार उन पर गोलियां चल आती है और वाटर कैनन से दूर भग आती है।देश की सरकार किसानों के लिए काम करने का दावा करती है लेकिन सरकार किसान विरोधी बिल लेकर आ रही है।
ज्ञातव्य है कि इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार ने सबसे पहले तीन बिलों को मंजूरी दी थी जिसको लेकर आज सैकड़ों की तादाद में किसान और मजदूर श्रम कानून कार्यालय में अपनी पीड़ा जाहिर करने आए हैं और ज्ञापन दिया उनका कहना है कि अगर सरकार इन श्रम कानूनों को रद्द कर पुराने कानून लागू नहीं करती तो यह संघर्ष सड़को तक पहुंच जाएगा जिसकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होगी,,,, साथ ही उन्होंने राजनीतिक पार्टियों पर भी आरोप लगाया कि कांग्रेस और बीजेपी पार्टी भी पूंजीपति की दलालों का काम कर रही है पार्टियों के झंडे बैनर जरूर अलग है लेकिन काम एक ही कर रही है किसान विरोधी,,,,वही किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामस्वरूप ने कहा कि पूरे देश में 10 केंद्रीय श्रम संगठन मजदूर संघ के आवाहन पर आज हड़ताल की गई है और सरकार ने 44 श्रम कानून लंबे संघर्ष के बाद मिले थे उन श्रम कानूनों पर फेरबदल कर दिया है और तीन नए ऐसे कानून बनाने जा रही है जिससे पुराने सारे कानून रद्द हो रहे हैं जिसको लेकर देश के सभी मजदूरों में रोष व्याप्त हो गया है वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए तीन बिल लाए गए हैं जिससे इस बिल के चलते प्रदेश की मंडियों खत्म हो जाएगी
