
प्रदेशव्यापी दस्तक अभियान का शुभारंभ सोमवार को जिले में भी किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसनानी के निर्देशन में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. तरुण गुप्ता ने अभियान का शुभारंभ किया। इसके साथ ही जिले के सभी शहरी एवं ग्रामीण विकासखंडों में भी अभियान प्रारंभ कर दिया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हासानी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों तक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाएं प्रभावी रूप से पहुंचाना है। इसके लिए आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम के माध्यम से घर-घर जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। अभियान के दौरान विशेष रूप से हाई रिस्क क्षेत्रों, शहरी स्लम, दूरस्थ एवं दुर्गम बस्तियों, खानाबदोश परिवारों, ईंट-भट्ठों, बंजारा बस्तियों तथा निर्माणाधीन स्थलों पर रहने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही अभियान की सतत मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाएगी।
31 अगस्त तक चलेगा अभियान
दस्तक अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक संचालित किया जाएगा। इसका प्रमुख उद्देश्य शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाना, बाल्यकालीन बीमारियों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करना तथा पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना है।

समय पर पहचान और उपचार पर रहेगा विशेष फोकस
अभियान के अंतर्गत बच्चों में गंभीर कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया, दस्त, विटामिन-ए की कमी जैसी समस्याओं की पहचान कर आवश्यक उपचार एवं रेफरल की व्यवस्था की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दस्त होने पर जिंक एवं ओआरएस का उपयोग, उचित शिशु एवं बाल आहार, गंभीर कुपोषण का संस्थागत प्रबंधन तथा निमोनिया का समय पर उपचार बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
अभियान के दौरान छह माह से कम आयु के शिशुओं में केवल स्तनपान को बढ़ावा देने, छह माह के बाद पूरक आहार शुरू कराने तथा बच्चों के पोषण एवं स्वच्छता संबंधी व्यवहार परिवर्तन के लिए भी व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
चार लाख से अधिक बच्चों तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवाएं
जिले में लगभग 350 दस्तक दलों के माध्यम से चार लाख से अधिक बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएंगी। अभियान के दौरान डीएसएस टूल के माध्यम से पांच वर्ष से कम आयु के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान की जाएगी तथा चिकित्सकीय रूप से जटिल मामलों को उपचार के लिए रेफर किया जाएगा। वहीं छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) अनुपूरण भी कराया जाएगा।
अभियान के शुभारंभ अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. तरुण गुप्ता, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. शिवराज सिंह चौहान सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
