सिस्टम की बेरुखी और एक मासूम की टूटती सांसें: SMA टाइप 2 पीड़िता अनिका के मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकारों से मांगा जवाब

By Abhishek Raghuvanshi
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हाईकोर्ट में 30 जून को होगी अगली सुनवाई

इंदौर। एक तरफ 9.5 करोड़ रुपये के महंगे इलाज का भारी-भरकम बोझ है और दूसरी तरफ एक मासूम बच्ची ‘अनिका’ की जिंदगी, जो हर गुजरते दिन के साथ अपनी सांसों के लिए संघर्ष कर रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type-2) जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस बच्ची को बचाने के लिए अब न्याय के मंदिर ने कड़ा रुख अपना लिया है।

सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में गहरी संवेदना दिखाते हुए केंद्र और राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जताई। मासूम के जीवन को सर्वोपरि मानते हुए कोर्ट ने दोनों सरकारों के वकीलों को विस्तृत लिखित जवाब पेश करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सिस्टम की संवेदनहीनता पर कोर्ट की फटकार

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हैरानी और निराशा की बात यह है कि एक बच्ची की जिंदगी से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में लगातार दूसरी सुनवाई में भी ‘एम्स’ (AIIMS) की ओर से कोई भी वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कुशल गोयल और केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अनुज भार्गव मौजूद रहे। लेकिन जब राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें “सरकार से अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं”, तो कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई। अदालत ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में भी यह पूछा गया था कि ‘मानवता के आधार पर’ बच्ची के इलाज में सरकार कितनी मदद कर सकती है, लेकिन इसके बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया।

वकीलों की दलील: हर गुजरता दिन ला रहा है खतरा

अनिका की ओर से मजबूती से पैरवी कर रहे अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने अदालत के सामने बच्ची की लगातार गंभीर होती स्थिति और इलाज की तात्कालिकता को रखा। मामले की पहली सुनवाई में भी इन वकीलों की दलील पर कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे और एम्स को नोटिस जारी किया था।

डॉलर की कीमतों ने बढ़ाई अनिका के परिजनों की पीड़ा

इस दुर्लभ बीमारी का इलाज किसी आम परिवार के बस की बात नहीं है। परिजनों के अनुसार, जीवन रक्षक उपचार (इलाज) की शुरुआती लागत करीब 9 करोड़ रुपये थी, लेकिन डॉलर की बढ़ती कीमतों के कारण अब यह खर्च लगभग 9.5 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। वर्तमान में बच्ची के इलाज को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपये की तत्काल आवश्यकता है। मामले में अगली सुनवाई 30 जून को होना है।

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