कमिश्नर के सामने कार ने एक टूव्हीलर को टक्कर मारी, एएसआई ने मदद नहीं की, सस्पेंड

By Abhishek Raghuvanshi
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ट्रैफिक पुलिस का काम सिर्फ चौराहे की व्यवस्था संभालना नहीं है, बल्कि हादसे में घायलों की मदद करना भी है। हाल ही में पुलिस कमिश्नर के सामने एक सड़क हादसा हुआ जिसमें उन्होंने पाया कि वहां ड्यूटी कर रहे एएसआई ने पीड़ित की कोई मदद नहीं की। ऐसे में उन्होंने उसे सस्पेंड कर दिया। यह भी सामने आया कि एसीपी ने अकेले उम्रदराज (50+) एएसआई की ड्यूटी वहां लगाई थी। जबकि यहां एक जवान को भी साथ में लगाना था। इसलिए एसीपी को भी ऑफिस अटैच कर दिया है। उसे सही जगह पर सही व्यक्ति की ड्यूटी लगाने की सीख लेने के आदेश दिए हैं।
घटना कुछ दिन पहले कृषि कॉलेज चौराहे की है। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह अपने निवास जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि एक कार रेड सिग्नल जंप करते हुई निकली और एक टू-व्हीलर चालक को टक्कर मार दी। कार वाला तो भाग गया, लेकिन टू-व्हीलर वाला गिर गया था। इस दौरान एएसआई ओमप्रकाश बौरागी दूर खड़े थे, लेकिन उन्होंने घायल की कोई मदद नहीं की। यह स्थिति देख कमिश्नर ने नाराजगी जाहिर की और साफ कहा कि सड़क हादसों में त्वरित मदद पुलिस की पहली जिम्मेदारी है। लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एएसआई ओमप्रकाश को सस्पेंड करने के आदेश दिए। साथ ही जोन-3 में पदस्थ ट्रैफिक एसीपी हिंदू सिंह मुवेल को भी ऑफिस अटैच कर दिया है।
कहां-किसकी ड्यूटी लगाना है यह समझना जरूरी
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने कहा कि ड्यूटी लगाने वाले एसीपी की जिम्मेदारी भी उतनी ही बनती है। यह तय करना कि किस चौराहे पर किसकी ड्यूटी लगेगी और किस तरह की सतर्कता जरूरी है, वरिष्ठ अधिकारियों का काम होता है। उन्होंने कहा कि एएसआई की ड्यूटी यातायात प्रबंधन में लगी थी, लेकिन हादसा होता देख उन्हें मदद के लिए आगे आना था। बहुत ज्यादा जागरूक होकर उन्हें मदद करनी थी। इतना ही नहीं, यह भी पाया गया कि वे उम्र में सीनियर हैं। इसलिए या तो उनकी ड्यूटी ऑफिस में लगानी थी या फिर उनकी अकेले ड्यूटी नहीं लगानी थी।

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