इंदौर जिले के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर कई शिक्षकों ने नौकरी हासिल की है। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ अब शिक्षा विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू हो गई है। ऐसे 74 संदिग्ध शिक्षक को तलब किया है।
फर्जी डिग्री से संविदा शिक्षक बनने वालों की खैर नहीं
सांवेर जनपद की नियुक्तियों पर लोकायुक्त की नजर
डिग्री कांड में 26 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस
इंदौर। इंदौर जिले के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर कई शिक्षकों ने नौकरी हासिल की है। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ अब शिक्षा विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू हो गई है। ऐसे 74 संदिग्ध शिक्षक हैं, जिनका पूरा लेखा-जोखा लोकायुक्त ने तलब किया है। आशंका जताई जा रही है कि इन शिक्षकों ने संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी डीएड और बीएड की अंकसूचियां लगाकर नौकरी हासिल की थीं।
24 शिक्षकों का वेतन रोका
शिक्षा विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए प्रथम चरण में 26 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस 27 फरवरी को जारी किया। इनमें से अब तक सिर्फ दो शिक्षकों ने ही अपना स्पष्टीकरण दिया है। वहीं जिन 24 शिक्षकों ने जवाब नहीं दिया, उनका वेतन रोक दिया गया है। वहीं जिन शिक्षकों ने जवाब दिया है, विभाग उससे भी संतुष्ट नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक जिन शिक्षकों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस मामले पर प्रमुखता से नईदुनिया में पूर्व में खबर प्रकाशित की गई थी।
लोकायुक्त द्वारा पूर्व में जारी पत्र में 74 शिक्षकों को संदिग्ध मानते हुए उनकी पहली नियुक्ति से जुड़ा पूरा रिकार्ड मांगा था। इसमें प्रथम नियुक्ति आदेश, नियुक्ति के समय प्रस्तुत की गई डीएड व बीएड की अंकसूचियां, सेवा पुस्तिका के पहले पृष्ठ, नियुक्ति संबंधी प्रविष्टियां, संविलियन आदेश की प्रति के साथ-साथ वर्तमान पदस्थापना संस्था और संकुल की जानकारी भी शामिल है।
सांवेर जनपद पंचायत से हुई थीं नियुक्तियां
जांच में सामने आया कि शिक्षकों ने वर्ष 2006-07 में हुई संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाई थी। यह सभी नियुक्तियां सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से की गई थीं। इनमें अधिकांश शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थ हैं, जबकि कुछ शिक्षक अकादमिक कार्यों से भी जुड़े हुए हैं।
जानकारी अनुसार वर्ष 2021 में सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने जांच करवाई थी। जांच में अधिकांश शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी पाई गई थीं।
जांच के दौरान शिक्षकों की अंकसूचियों का सत्यापन माध्यमिक शिक्षा मंडल से करवाने की अनुशंसा की थी। जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 45 शिक्षकों की अंकसूचियों का मिलान कर जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजी।
जांच समिति की रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की पुष्टि
इस मामले में चार प्राचार्यों की एक समिति गठित की गई, जिसने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि संविदा शाला शिक्षक परीक्षा में प्रस्तुत अंकसूचियां माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी नहीं की गई हैं। कई मामलों में एक ही रोल नंबर पर अन्य परीक्षार्थियों की अंकसूचियां मिलीं, जिससे दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और संदेहास्पद साबित हुए।
FIR के निर्देश के बावजूद एक साल से टालमटोल
इस रिपोर्ट के आधार पर सितंबर 2024 में वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी ने उत्कृष्ट उमावि सांवेर, कन्या उमावि सांवेर, उमावि चन्द्रावतीगंज, उमावि डकाच्या, उमावि मांगल्या, उमावि धरमपुरी और उमावि अजनोद संकुल के प्राचार्यों को संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके एक वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी भी संकुल द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षक वर्षों से सेवा में बने हुए हैं। फर्जी अंकसूची मामले में शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जा रही है। हमने 26 शिक्षकों को नोटिस जारी किए थे, जवाब नहीं देने पर कुछ शिक्षकों का वेतन भी रोका गया है।
