कलेक्टर श्री शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आज महिला एवं बाल विकास द्वारा कुपोषण मुक्त इंदौर कार्ययोजना को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्री वर्मा ने महिला एवं बाल विकास द्वारा कुपोषण मुक्त इंदौर कार्ययोजना 2026-27 सुपोषण संकल्प की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि आगामी महीनों में इंदौर जिले में कुपोषित बच्चों को चिन्हित करना और कुपोषण उन्मूलन के लिये विशेष रणनीति बनाना है। इस कार्य में आँगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पहले बच्चों की नियमिंत स्क्रीनिंग की जाएगी और इसके बाद उनका उपचार किया जायेगा। 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के जो बच्चे अतिकुपोषित है या जिनका वजन कम है, उन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। बैठक में अपर कलेक्टर श्री नवजीवन पंवार, अपर कलेक्टर श्री रोशन राय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री सिद्धार्थ जैन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्यर अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री रजनीश सिन्हा, डॉ. हेमंत गुप्ता, डॉ. शैलेन्द्र जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में कलेक्टर श्री वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इंदौर जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिये कार्ययोजना पर जमीनी स्तर पर कार्य करें। कुपोषण उन्मूलन के लिए सामुदायिक भागीदारी, पोषण पखवाड़ा और जनजागरूकता जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रतिमाह स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की जाये। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित की जाये। 0 से 5 वर्ष आयु के बच्चों का वजन किया जाये। इस कार्य शिशु रोग विशेषज्ञ का सहयोग लिया जाये। अतिकम वजन बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाये। सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के वजन से संबंधित उपकरण एवं अन्य संसाधन की समुचित व्यवस्था निश्चित की जाये। अतिगंभीर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिये शिविर आयोजित किये जाये। डिजिटल ट्रेकिंग पोषण ट्रेकर एप के माध्यम से प्रत्येक बच्चे की लंबाई और वजन की रीयल टाईम मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाये। गंभीर कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों की अलग सूची बनायी जाये। साथ ही जिले के सभी पोषण पुनर्वास केन्द्रों में चिकित्सकीय जटिलता वाले बच्चों की पहचान करके एनआरसी में एएनएम/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा भर्ती कराया जाये।
कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि सभी बच्चों की निमोनिया और एनीमिया की जाँच की जाये। साथ ही उन्हें ओआरएस के पैकेट तथा जिंक टेबलेट वितरित की जाये। सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों में एमोक्सीसिलिन, फोलिक एसिड, विटामिन ए, आईएफए और मल्टी विटामिन की टेबलेट वितरित की जाये। आँगनवाड़ी केन्रोंके और उसके आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखा जाये। साथ ही सामुदायिक स्तर पर सभी लोगों को कुपोषण के लक्षण, पहचान एवं उपचार हेतु जागरूक किया जाये।
