वंदे मातरम पर विवाद – रूबीना बोली एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ

By Abhishek Raghuvanshi
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नगर निगम के दो दिवसीय बजट सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। वंदे मातरम को लेकर कांग्रेसी पार्षद फौजिया शेख ने कहा कि इस्लाम में इसे गाने की इजाजत नहीं है तो दूसरी कांग्रेसी पार्षद रूबीना खान ने भाजपाई पार्षदों को चुनौती देते हुए कहा कि एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ।
वंदे मातरम को लेकर बढ़ा विवाद।
पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक।
सभापति ने सदन से निकाला।

इंदौर। नगर निगम के दो दिवसीय बजट सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। वंदे मातरम को लेकर कांग्रेसी पार्षद फौजिया शेख ने कहा कि इस्लाम में इसे गाने की इजाजत नहीं है तो दूसरी कांग्रेसी पार्षद रूबीना खान ने भाजपाई पार्षदों को चुनौती देते हुए कहा कि एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ।
बाद में फौजिया ने सफाई दी कि संविधान में वंदे मातरम को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। इसे गाने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता। हंगामा बढ़ता देख सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख को पूरे दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया।
अमर्यादित भाषा और व्यक्तिगत हमले
अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल यहीं नहीं थमा। एक कांग्रेसी पार्षद ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को धृतराष्ट्र बता दिया तो दूसरे ने भाजपाई पार्षदों को लेकर यहाँ कह दिया कि वे कुत्ते जैसे भौंकते हैं। एक ने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को गद्दार बता दिया। बार-बार हंगामा होता रहा और पार्षद सभापति की आसंदी के सामने धरना देते रहे। 8400 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट पर बहस के लिए जमा हुए पार्षद एक-दूसरे को नीचा दिखाने में जुटे रहे।
प्रश्नकाल के दौरान शुरू हुआ विवाद
बुधवार सुबह ठीक 11.15 बजे वंदे मातरम के साथ निगम सम्मेलन शुरू हुआ। प्रश्नकाल में फौजिया शेख का प्रश्न पहले नंबर पर था। सभापति ने उनका नाम पुकारा लेकिन वे सदन में नहीं थीं। इस पर कार्रवाई आगे बढ़ गई और दूसरे पार्षद प्रश्न पूछने लगे। कुछ देर बाद फौजिया शेख सदन में आई। उन्होंने आपत्ति ली कि उन्हें प्रश्न पूछने का मौका नहीं मिला। भाजपा पार्षद महेश बसवाल ने उन्हें बताया कि आपका नंबर निकल गया है, आप वंदे मातरम के समय उपस्थित नहीं थीं। इस पर फौजिया ने कहा कि हम वंदे मातरम नहीं गाते। इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया।
सदन से बाहर की गईं पार्षद फौजिया शेख
भाजपा पार्षद सभापति की आसंदी के सामने पहुंच गए। उनका कहना था कि यह देश की अस्मिता का सवाल है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इसका विरोध किया। हंगामा बढ़ता देख सभापति ने फौजिया को दस मिनट के अंदर सदन से बाहर जाने की चेतावनी दी, लेकिन वे नहीं गईं। उनका कहना था कि संविधान में वंदे मातरम गाने की अनिवार्यता नहीं है। उन्होंने सभापति को मोबाइल पर नियम भी दिखाए। अंतत: उन्हें सदन से बाहर जाना ही पड़ा।
हंगामे के बीच बिगड़े रूबीना के बोल
हंगामा बढ़ता देख पार्षद एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे। इस बीच पार्षद रूबीना खान ने फौजिया शेख का साथ देते हुए भाजपाई पार्षदों से कहा कि एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ। इसके बाद हंगामा बढ़ गया। रूबीना यहीं नहीं रुकी। उन्होंने यहाँ तक कहा कि हिंदुओं की अस्थियां गंगा में बहाई जाती हैं जो अरब सागर में मिलती हैं, जबकि हमारी अस्थियां इस देश की मिट्टी में मिलेंगी क्योंकि हमें दफनाया जाता है। हम एक अल्लाह को मानते हैं। हमारे धर्म में किसी अन्य की इबादत की अनुमति नहीं है। हम दादागिरी किसी के बाप की नहीं सहते हैं।
भाजपा का पलटवार: तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप
यह कांग्रेस की असली सोच का खुला प्रदर्शन है। कांग्रेस आज तुष्टीकरण की राजनीति में इतनी गिर चुकी है कि उसे राष्ट्र सम्मान भी खटकने लगा है। पार्षद की अभद्र भाषा “एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ”, क्या यही कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति है? जब देश “वंदे मातरम” के गौरवशाली 150 वर्ष मना रहा है, तब कांग्रेस का यह चेहरा देश की भावनाओं का अपमान है। कांग्रेस तय करे, राष्ट्र पहले या वोट बैंक। देश जवाब मांग रहा है।

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