इंदौर में नाबालिग बेटी की शादी पर ब्रेक, 10 दिन उम्र कम होने पर रुका विवाह

By Abhishek Raghuvanshi
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राऊ तहसील स्थित धन्नड क्षेत्र में बाल विवाह रोकने का एक स्पष्ट मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की समय पर कार्रवाई से नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी गई।
इंदौर। राऊ तहसील स्थित धन्नड क्षेत्र में बाल विवाह रोकने का एक स्पष्ट मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की समय पर कार्रवाई से नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी गई। पिता अपनी दोनों बेटियों की शादी एक ही दिन करने की तैयारी में था, लेकिन छोटी बेटी के बालिग नहीं होने के कारण उसका विवाह रोक दिया गया। बालिका की उम्र 18 वर्ष पूरी होने में अभी 10 दिन बाकी थे। अब अक्षय तृतीया पर बालिग होने पर विवाह होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग को मिली सूचना के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा के निर्देश पर उड़नदस्ता की टीम बाल विवाह रोकने के लिए मौके पर पहुंची।
दस्तावेजों की जांच और कानूनी समझाइश
टीम ने जब जांच की तो पाया कि छोटी बेटी की उम्र 18 वर्ष पूरी होने में अभी 10 दिन बाकी हैं। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद टीम ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध कानून की जानकारी दी और शादी रोकने के लिए समझाइश दी। शुरुआत में परिवार ने सामाजिक कारणों और तैयारियों का हवाला देकर विवाह करने की बात कही, लेकिन प्रशासन ने साफ किया कि बालिग होने से पहले विवाह कराना कानूनन अपराध है। इसके बाद दोनों पक्षों ने सहमति जताई और छोटी बेटी की शादी टाल दी गई।
‘शादी कर देंगे, भेजेंगे नहीं’, पर प्रशासन रहा अडिग
उड़नदस्ता में शामिल महेंद्र पाठक और संगीता सिंह मौके पर पहुंचे और विवाह नहीं करने की बात परिजनों से कही। बेटी के पिता ने कहा कि सारी तैयारी हो गई है, समाज में इज्जत खराब होगी। सिर्फ 10 दिन तो बाकी हैं, शादी कर देंगे पर बेटी को नहीं भेजेंगे। जांच दल ने बालिग होने पर ही विवाह की बात रखी, तो परिजन मान गए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अब केवल बड़ी बेटी की शादी ही संपन्न होगी। छोटी बेटी की शादी उसके 18 वर्ष पूरे होने के बाद नए मुहूर्त में अक्षय तृतीया पर की जाएगी। बताया जा रहा है कि इसके लिए अक्षय तृतीया का समय तय किया जा सकता है।
तहसीलदार और एसडीएम को दी गई सूचना
पाठक ने बताया कि उक्त बालिका का विवाह निरस्त करने के लिए तहसीलदार राऊ सत्येंद्र प्रताप सिंह व वर पक्ष के लिए एसडीएम महू राकेश परमार को सूचना दी गई थी। तहसीलदार राऊ के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक संजय भदौरिया ने भी परिजनों को समझाइश दी। समय रहते किए गए इस हस्तक्षेप से न केवल एक गैर-कानूनी कृत्य को रोका गया, बल्कि परिजनों को भी कानूनी कार्रवाई की जद में आने से बचा लिया गया।

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