एक जिला-एक उत्पाद में शामिल है केला फसल
इंदौर संभाग के बुरहानपुर जिले के लिए गौरव का विषय है कि जिले के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि जिले के कृषकों की अथक मेहनत, जनप्रतिनिधियों के सतत सहयोग एवं प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम है। जीआई टैग मिलने से जिले के किसानों, व्यापारियों एवं कृषि आधारित उद्योगों को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है।
बुरहानपुर जिले में केले की खेती का इतिहास वर्ष 1960 के आसपास से जुड़ा हुआ है। जिले की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि एवं विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां उत्पादित केला अपने विशिष्ट स्वाद, आकर्षक रंग एवं उच्च गुणवत्ता के लिए देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी विशेष पहचान रखता है।
जिले में वर्तमान में लगभग 18,640 किसान केले की खेती से जुड़े हुए हैं। जिले में कुल 26,120 हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले की खेती की जा रही है, जिससे लगभग 18,28,400 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। बुरहानपुर केले की मांग देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है।
जीआई टैग मिलने के प्रमुख लाभ
जीआई टैग मिलने से बुरहानपुर के केले को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान प्राप्त होगी। इससे किसानों एवं व्यापारियों को कई लाभ मिलेंगे।
- उत्पाद की ब्रांड वैल्यू में वृद्धि होगी।
- किसानों को उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
- नकली एवं अन्य क्षेत्रों के उत्पादों से संरक्षण मिलेगा।
- निर्यात के नए अवसर विकसित होंगे।
- कृषि आधारित उद्योगों एवं प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विभागीय जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत जिले में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है। इन इकाइयों में केले से विभिन्न प्रकार के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की मांग में भी वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी। बुरहानपुर केले को जीआई टैग मिलना जिले के कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
