गंगा दशहरा महोत्सव अंतर्गत जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू में विकासखंड स्तरीय कार्यक्रम सम्पन्न

By Abhishek Raghuvanshi
4 Min Read

गंगा दशहरा महोत्सव के पावन अवसर पर आज जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू की समस्त ग्राम पंचायतों में विविध धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जनजागरूकता कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आयोजित किए गए। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत आयोजित इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन एवं जनभागीदारी के माध्यम से जल संवर्धन के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करना रहा। इस अवसर पर विकासखंड की सभी ग्राम पंचायतों में गंगा जल यात्रा, गंगा पूजन, नदी-नालों, कुओं एवं बावड़ियों की साफ-सफाई, जल स्रोतों के संरक्षण, श्रमदान तथा जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार संबंधी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। ग्रामवासियों, महिलाओं, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
विकासखंड स्तरीय मुख्य कार्यक्रम ग्राम पंचायत जाम खुर्द में आयोजित किया गया, जहाँ ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित प्राचीन बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। बावड़ी के पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक किया गया तथा क्षेत्र की मातृशक्तियों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में भव्य सामूहिक गंगा जल यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने कलश यात्रा के माध्यम से ग्राम में जल संरक्षण एवं सनातन संस्कृति का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में क्षेत्रीय विधायक सुश्री उषा ठाकुर उपस्थित रहीं। उनके साथ जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री सरदार मालवीय, मंडल अध्यक्ष श्री महेश यादव, मंडल महामंत्री, स्थानीय सरपंच, पूर्व सरपंच, पंच-सरपंचगण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
विधायक सुश्री उषा ठाकुर द्वारा कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से रुद्राष्टकम का पाठ एवं गायन करवाया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने जल को जीवन का आधार बताते हुए सभी नागरिकों से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल स्रोतों को सदैव पूजनीय माना गया है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने सभी ग्रामवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, वर्षा जल संचयन अपनाने एवं गांवों में स्थित पारंपरिक कुएँ, बावड़ियों एवं तालाबों के संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वजों द्वारा निर्मित जल संरचनाएँ केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं बल्कि जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम स्तर पर पूर्व से स्थापित कुओं एवं बावड़ियों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण के लिए कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों द्वारा ऐसे सभी पारंपरिक जल स्रोतों को पुनः उपयोगी बनाने हेतु जनसहभागिता आधारित अभियान चलाने पर सहमति व्यक्त की गई।
गंगा दशहरा महोत्सव अंतर्गत आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से विकासखंड क्षेत्र में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं सांस्कृतिक जागरूकता का प्रभावी संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी नागरिकों ने जल बचाने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

Exit mobile version