इंदौर में यशवंत सागर के पानी का देवधर्म टेकरी पर ट्रीटमेंट प्लांट में लाकर क्लोरीनेशन के माध्यम से शुद्धीकरण किया जाता है। इसके बाद यहां से बीएसएफ, संगम नगर, पल्हर नगर व किला मैदान स्थित पानी की टंकियों को भरा जाता है। इसके बाद इन टंकियों से जुड़ी कॉलोनियों में जल वितरित किया जाता है।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने उठाए जल वितरण सुधार और सुरक्षा के मुद्दे
यशवंत सागर और सिरपुर तालाब में गंदा पानी आने का मुद्दा भी उठा
गंदा पानी वर्षाकाल में कैनाल से यशवंत सागर तालाब तक पहुंच रहा
इंदौर। दूषित पेयजल से हुई त्रासदी का सामना कर रहे इंदौर के अन्य पेयजल स्रोत भी सुरक्षित नहीं हैं। शहर के बड़े हिस्से में जिस यशवंत सागर से जल प्रदाय किया जाता है उसका पानी भी दूषित हो रहा है। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि औद्योगिक और रहवासी क्षेत्रों का दूषित जल सीधा यशवंत सागर और सिरपुर तालाब में मिल रहा है। इससे ये दोनों जल स्रोत दूषित हो रहे हैं।
बैठक में पेयजल और ड्रेनेज लाइनों की समय-समय पर देख-रेख का मुद्दा भी उठा। इस पर भी सहमति बनी कि नई और पुरानी पेयजल व ड्रेनेज लाइनों की जीआइएस मैपिंग की जाएगी। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में यशवंत सागर और सिरपुर तालाब में गंदा पानी आने का मुद्दा भी उठा।
जलकार्य समिति के अध्यक्ष अभिषेक बबलू शर्मा ने कहा कि पीथमपुर और आसपास की कॉलोनियों का गंदा पानी वर्षाकाल में कैनाल से यशवंत सागर तालाब तक पहुंच रहा है।
गंभीर नदी में मिलने वाले नाले कर रहे यशवंत सागर को गंदा
भागीरथपुरा में नर्मदा के दूषित पानी में फिकल कालीफार्म बैक्टीरिया मिला था। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में चिराखान नाले व गंभीर नदी के पानी में भी यह बैक्टीरिया मिला है। इस बैक्टीरिया की मात्रा नाले में 17 हजार एनपीएम मिली है। गंभीर नदी का यही पानी यशवंत सागर में पहुंच रहा है।
यशवंत सागर के पानी का देवधर्म टेकरी पर ट्रीटमेंट प्लांट में लाकर क्लोरीनेशन के माध्यम से शुद्धीकरण किया जाता है। इसके बाद यहां से बीएसएफ, संगम नगर, पल्हर नगर व किला मैदान स्थित पानी की टंकियों को भरा जाता है। इसके बाद इन टंकियों से जुड़ी कॉलोनियों में जल वितरित किया जाता है।
देपालपुर तहसील में कलारिया में चिराखान नाले का गंदा पानी गंभीर नदी में मिल रहा है। गंभीर नदी यशवंत सागर के कैचमेंट एरिया में आती है। इस वजह से इसका गंदा पानी यशवंत सागर में मिल रहा है। गंभीर नदी में गत दिनों मछलियों के मरने की घटना सामने आई थी।
इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
29 गांवों में अमृत-2 के काम जारी, छूटे गांवों को शामिल करेंगे।
पांच लाख परिवार, तीन लाख ही नल कनेक्शन अन्य को जोड़ेंगे।
मुंडी और आसपास की कालोनियों में ड्रेनेज सीधे नाले में जा रहा।
शहर में 1.45 लाख नए कनेक्शन देने का कार्य किया जा रहा है।
गांवों में नल-जल योजना बंद हो रही, पंचायत सुधार नहीं कर रही।
टीम क्षेत्र की जांच करेगी
रहवासी क्षेत्र से गंभीर नदी तक हिस्से में जल्द होगी जांच धार कलेक्टर के निर्देश पर हमने रेवेन्यू, प्रदूषण नियंत्रण पुलिस व एमपीआईडीसी की टीम बनाई है। यह टीम पीथमपुर सेक्टर 1 व 2 और वहां के रहवासी और उससे गंभीर नदी तक के क्षेत्र की जांच करेगी। – अजय मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड धार
सही तरीके से लाइन डालने का काम नहीं हो रहा
पानी और ड्रेनेज लाइन अलग-अलग हों। ड्रेनेज लाइन कहां डाली जा रही है, कहां मिल रही, यह भी पता नहीं चल रहा। सही तरीके से लाइन डालने का काम नहीं हो रहा। – रमेश मेंदोला, विधायक
फीडबैक सही नहीं आ रहा
पहले अमृत-1 के कार्यों को दिखाएं, ग्राउंड में फीडबैक सही नहीं आ रहा है। पानी की समस्या आ रही है। (अधिकारी प्रजेंटेशन नहीं लाए तो बगले झांकने लगे) – शंकर लालवानी, सांसद
नियमित जांच की जाए
नई कॉलोनियों में स्टार्म वाटर लाइन को अनिवार्य किया जाए। कॉलोनाइजर स्टार्म वाटर लाइन नहीं डाल रहे। नई कॉलोनियों में एसटीपी की भी नियमित जांच की जाए। – मधु वर्मा, विधायक
