
शादी के नाम झांसा देकर नाबालिग के साथ रेप करने वाले आरोपी को जिला कोर्ट ने 29 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को 2 लाख रु. का मुआवजा दिलवाने की भी अनुशंसा की है।
मामला शहर के पूर्वी क्षेत्र का है। 2 मई 2023 को पीड़िता ने लसूडिया थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि घर के सामने वाले रहने वाले बादल पिता मुकेश को 6-7 सालों से जानती है। 2019 से वह आते-जाते समय उससे बात करने की कोशिश करता था। उसने कई बार कहा वह उससे प्यार करता है और शादी करना चाहता है। एक दिन रात को बादल ने उसे फोन लगाकर अपने घर बात करने के लिए बुलाया। जब वह उसके घर के गेट के बाहर पहुंची तो उसने उसका हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया और उसके साथ जबर्दस्ती गलत काम किया।
बादल ने उसे धमकी दी कि यदि उसने घटना की जानकारी किसी को दी तो वह उसे जान से मार देगा। जब वह रोने लगी तो उसने समझाया कि वह उससे प्यार करता है और शादी उसी से करेगा। इसके बाद उसने कई बार उसे इमोशनली ब्लैकमेल कर घर में बुलाया और उसके साथ गलत काम किया।
1 मई 2023 को रात 12 बजे बादल ने उसे फिर से बात करने के लिए अपने घर बुलाया और उसके साथ गलत काम किया। जब उसने बादल से पूछा कि वह उससे शादी कब करेगा तो उसने शादी करने से मना कर दिया। उसने कहा कि वह उससे साथ शादी नहीं करेगा, उसे जो करना है, कर लें। फिर बादल ने उसे धक्का देकर घर से बाहर कर दिया।
पीड़िता ने घर के बाहर देखा कि उसके काका बैठे है तो डरकर ऑटो के पीछे जाकर छिप गई। इस दौरान उसकी मां की नींद खुल गई। फिर मां और मामा उसे ढूंढते हुए वहां आए और उसे अपने साथ ले गए। इसके बाद उसने अपनी मां को पूरी घटना की जानकारी दी और युवक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
मामले में पुलिस ने बादल के खिलाफ धारा 376, 376(2) (एन), 506 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत केस दर्ज कर युवक को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही पीड़िता और साक्षियों के बयान लिए और कोर्ट में चालान पेश किया। केस में करीब दो साल तक सुनवाई चली। 14 जून को कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट द्वारा फैसले की जानकारी 20 जून को दी गई। शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सुशीला राठौर ने की
