जयपुर। राजस्थान पुलिस ने मध्यप्रदेश के जिन दो पत्रकारों को हिरासत में लिया और फिर एक दिन बाद रिहा कर दिया, उनका दावा है कि ए आई वीडियो के ज़रिए उन्हें फँसाया गया।
पत्रकारों का कहना है कि जो कथित वीडियो उनके खिलाफ सबूत के रूप में पेश किया गया, वह न तो उनकी आवाज़ है और न ही उनका चेहरा — बल्कि वह एआई (Artificial Intelligence) से तैयार किया गया वीडियो है।
जयपुर पुलिस आयुक्त बीजू जॉर्ज जोसेफ ने बताया कि वीडियो की सत्यता जांचने के लिए दोनों से वॉयस सैंपल लिए जाएंगे। पुलिस ने उन्हें बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस जारी कर पाँच दिन बाद फिर से पूछताछ में शामिल होने के लिए कहा है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि यह साबित हुआ कि वीडियो वास्तव में एआई-जनित है, तो यह मामला देश में पत्रकारों के खिलाफ एआई-आधारित साक्ष्य के दुरुपयोग का एक नया और गंभीर उदाहरण बन सकता है।
पुलिस ने दोनों पत्रकारों को उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के खिलाफ “फर्जी और मानहानिकारक खबरें” चलाने तथा पांच करोड़ रुपये मांगने के आरोप में भोपाल से पकड़ा था।
गिरफ्तार किए गए दोनों पत्रकार — ‘द सूत्र’ नामक न्यूज पोर्टल के संपादक आनंद पांडे और प्रबंध संपादक हरीश दिवेकर — को शुक्रवार को जयपुर लाया गया था। शनिवार को पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया।
पुलिस ने दोनों को प्रश्नावली दी है जिसमें पूछा गया है कि दिया कुमारी के खिलाफ खबरें उन्होंने किन स्रोतों से और किस आधार पर प्रकाशित कीं, और इन्हें बिना सत्यापन के क्यों साझा किया।
शिकायत उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के कार्यालय से दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप है कि पत्रकारों ने “फर्जी और मानहानिकारक खबरें चलाकर ब्लैकमेलिंग की कोशिश की और खबरें हटाने के लिए करोड़ों रुपये की मांग की।”
