इंदौर में ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनके लिए कोई नियंत्रण नीति नहीं है। इससे शहरवासियों को परेशानी हो रही है और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। राजवाड़ा जैसे सघन क्षेत्रों में ई-रिक्शा बेखौफ होकर चलते हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती। हाई कोर्ट ने भी ई-रिक्शा की समस्या पर चिंता जताई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इंदौर शहर में बारह हजार से ज्यादा ई-रिक्शा शहर में दौड़ रहे हैं।
इसके बाद भी इंदौर में लगातार बढ़ती जा रही ई-रिक्शा की संख्या।
HC परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को लगा चुका है फटकार।
इंदौर। कुछ वर्ष पहले जब शहर में ई-रिक्शा का चलन शुरू हुआ था तो शहरवासियों को उम्मीद थी कि उन्हें आवागमन के लिए प्रदूषण रहित साधन मिल गया। न वाहन की कर्कश आवाज सुनाई देगी न इससे निकलने वाला काला धुआं नजर आएगा। ऐसा हुआ भी, लेकिन राहत के नाम पर शुरू हुई सुविधा शहरवासियों के लिए अब परेशानी का सबब बन गई है।
शहर में ई-रिक्शा की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी कि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया। राजवाड़ा जैसा सघन क्षेत्र जहां पैदल चलना भी मुश्किल है वहां ये ई-रिक्शा बेखौफ होकर सड़क पर मंडराते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता। राजवाड़ा पर तो पुलिस चौकी के समीप जिम्मेदारों की आंखों के सामने ही अस्थाई ई-रिक्शा स्टैंड बन गया है। आज हालत यह है कि जिस गली, मोहल्ले, कालोनी, सड़क पर पर निकल जाओ, ई-रिक्शा ही नजर आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने के लिए आज तक कोई नीति नहीं बनी। इतना ही नहीं न तो इनके लिए कोई रूट प्लान तैयार किया गया न और न कभी किराया नियंत्रित करने का प्रयास हुआ। ऐसा नहीं कि जिम्मेदारों ने कागजों पर ई-रिक्शा को नियंत्रित करने का प्रयास न किया हो, लेकिन ये प्रयास कभी कागजों से निकलकर मैदान में नजर नहीं आए।
