इंदौर नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक संजय वेद को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। वेद ने सफाईकर्मी से नियुक्ति के बदले 20 हजार की मांग की थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने जाल बिछाया और 7 हजार रुपये लेते ही उसे पकड़ लिया।
नियुक्ति के बदले अधीक्षक ने मांगी थी रिश्वत
सफाईकर्मी ने लोकायुक्त कार्यालय में की थी शिकायत
पहली किस्त में 5 हजार रुपये दे चुका था
इंदौर। इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक संजय वेद को बुधवार को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। वेद एक सफाईकर्मी से नियुक्ति दिलाने के बदले में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था।
शिकायतकर्ता सफाईकर्मी पहले ही 5 हजार रुपये की पहली किश्त दे चुका था। बुधवार को जब उसने 7 हजार रुपये की दूसरी किश्त दी, तो लोकायुक्त की टीम ने तत्काल उसे दबोच लिया।
2008 से कर रहा था सेवा
लालाराम नगर निवासी भरत अर्जुन सिंगोलिया ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दी थी कि वह वर्ष 2008 से जुलाई 2024 तक इंदौर नगर निगम के जोन क्रमांक 11 और 18 में मस्टरकर्मी (सफाईकर्मी) के रूप में कार्यरत रहा।
जुलाई 2024 में उसे कार्यमुक्त कर दिया गया था। उसके बाद में उसने अपील की, जिस पर 13 मई 2025 को उपायुक्त ने दोबारा जोन-18 में नियुक्ति का आदेश दिया। जब वह नियुक्ति आदेश लेकर ज्वाइनिंग के लिए गया तो कार्यालय अधीक्षक संजय वेद ने 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल
कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद आखिरकार रिश्वत की रकम 15 हजार रुपये में तय हुई। संजय वेद पहले ही पांच हजार रुपये ले चुका था और बुधवार को सफाईकर्मी से बाकी सात हजार रुपये लेने के लिए पिपल्याहाना चौराहे पर पहुंचा। जैसे ही उसने रुपये लिए, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान उसने बचने के लिए कहा कि रुपये जबरदस्ती उसकी जेब में रख दिए गए, लेकिन लोकायुक्त ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। मामला अब आगे की जांच में है।
