अगर कोई यह कहे की संघ की 100 वर्ष की यात्रा मे संघ ने क्या प्राप्त किया तो कहने को और बताने को तो बहुत कुछ है

By Abhishek Raghuvanshi
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अगर कोई यह कहे की संघ की 100 वर्ष की यात्रा मे संघ ने क्या प्राप्त किया तो कहने को और बताने को तो बहुत कुछ है । पर उन सबसे परे मात्र 5 वर्ष की आयु मे अपने बालक को संघ की गणवेश पहनाकर स्वयं को गौरान्वित मान रहे उन माता-पिता का संघ के प्रति वो विश्वास है जो शायद उसके विद्यालय मे प्रवेश के प्रथम दिन भी न रहा होगा क्योकि एक तरफ भौतिक शिक्षा है और दूसरी तरफ संस्कारो की पाठशाला,संस्कार अपने माता-पिता गुरुजनो के सम्मान का,संस्कार अपनी संस्कृति अपने देश के स्वाभिमान के मान का,संस्कार प्रखर राष्ट्रभक्ति और आदर्श महापुरुषो के प्रेरक जीवन के गौरव गान का,संस्कार मै नही हम सभी के उच्च विचार का,संस्कार नदी,पर्वत,वन प्रकृति पूजक परंपरा के पालन का,संस्कार एकता मे विविधता की सुंदरता के स्वीकार्यता का और न जाने कितने प्रकार गुणो का सृजन केवल संघ की शाखा मे भेजने भर से हो जाता है तो कोई माता-पिता अपने पुत्र को संघ की शाखा मे भेजकर क्यू न गौरान्वित हो ? क्योकी उन्होने न केवल अपने परिवार को अपितु देश को एक चरित्र संपन्न राष्ट्र प्रथम के विचार से जीवन जीने वाला एक श्रेष्ठ नागरिक देने की और अपना कदम.बढाया है । ।। भारत माता की जय ।।

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