चतुर्वेदी का बेटा भी पिता को तलाशते हुए रिक्शा चालक को खोज रहा था
पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल के इंस्पेक्टर प्रभात नारायण चतुर्वेदी की हत्या का पुलिस ने लगभग खुलासा कर दिया है। हत्या नशेड़ी रिक्शा चालक बदमाश ने की। बताते हैं वह इंस्पेक्टर को उनके घर से लेकर निकला था। बायपास पर पन्ना जाने वाली बस में बैठाना था, लेकिन रास्ते में नशा करने के बाद रिक्शा चालक ने विवाद बाद उनकी हत्या कर शव खजराना बायपास इलाके में फेंक दिया
खजराना पुलिस सूत्रों की मानें तो इंस्पेक्टर चतुर्वेदी की हत्या को तात्कालिक विवाद में रिक्शा चालक ने अंजाम दिया है। शव शिनाख्ती के लिए रिवर्स इनवेस्टीगेशन कर रूट को ट्रैक किया तो इंस्पेक्टर की पहचान हो गई। उधर, चतुर्वेदी का बेटा भी पिता को तलाशते हुए रिक्शा चालक को खोज रहा था। आरोपी चालक को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करेगी। हालांकि, आधिकारिक तौर पर मामले का खुलासा नहीं हुआ है। डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा का कहना है, आरोपियों के अहम सुराग मिले हैं। कुछ रिक्शा चालकों को संदेह के आधार पर थाने में बैठाया है।
स्कीम-74 भी गए थे ऑटो से
प्रभात नारायण चतुर्वेदी की मां की पन्ना में मौत हो गई थी। उनकी पत्नी पहले ही पन्ना के लिए निकल चुकी थीं। प्रभात नारायण ने देर रात घर से 50 हजार रुपए लिए। फिर अकेले ही ऑटो में बैठकर निकले थे। पहले स्कीम-74 में अपने निर्माणाधीन मकान पर गए। वहां से रिक्शा चालक को बेटे के होटल चलने का बोला, लेकिन वह उन्हें बायपास ले गया। वहां रिक्शा चालक ने नशा किया तब वे उसी के साथ थे। अनुमान है कि उनके रुपए लूटने के लिए उसने साथियों के साथ इंस्पेक्टर की हत्या कर दी।
बायपास पर कुछ देर रुकने के बाद की हत्या : इधर पुलिस को प्राथमिक जांच में पता चला है कि इंस्पेक्टर प्रभात नारायण घर से जिस रिक्शा में निकले थे। वह रिक्शा उन्हें विजय नगर क्षेत्र से खजराना एमआर 10 होकर लाभगंगा गार्डन की ओर सुनसान इलाके में ले गया। ऐसा पता चला है कि वे पन्ना जाने के लिए बायपास से बस में सवार होना चाहते थे। रिक्शा चालक ने उनके पास कैश रुपया देख बायपास पर उन्हें एक स्थान पर रोका भी था। बस के इंतजार के दौरान ये अलाव भी तापने के लिए रुके थे।
…तो एक परिवार शव ले जाता, हो जाता उनका अंतिम संस्कार
पुलिस शव की शिनाख्त में जुटी थी, इसी दौरान लापता लोगों के परिवार वालों को भी सूचना दी गई थी। परदेशीपुरा का एक परिवार भी खजराना पहुंचा था। परिवार ने विशाल सेन की गुमशुदगी परदेशीपुरा में दर्ज करवाई थी। पुलिस ने जब एमवाय में शव की शिनाख्त की तो परिजन ने विशाल सेन नाम से मृतक की पहचान लगभग कर ली थी। लेकिन, पत्नी ने हाथ के टैटू और सीने के बाल देखे तो वह इनकार कर गई। यदि वह नहीं पहचानती तो शायद इंस्पेक्टर का शव परदेशीपुरा के परिजन ले जाते और अंतिम संस्कार कर देते।
