
दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़े झूठे केसों को सुप्रीम कोर्ट लीगल टेररिज्म (कानूनी आतंकवाद) कह चुका है। उसके बावजूद इन कानूनों का दुरुपयोग नहीं थम रहा है। हाल ही में दहेज प्रताड़ना से जुडे़ केस में परेशान होकर 28 साल के नितिन ने आत्महत्या कर ली।
सुसाइड नोट में दहेज कानूनों में बदलाव का गंभीर मुद्दा भी उठाया है। भास्कर ने सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज जस्टिस सुशीलकुमार गुप्ता के साथ इन केसस की स्टडी की तो कई चौकाने वाले मामले सामने आए। एक केस में पति-पत्नी के विवाद में नाराज पत्नी ने 55 साल के ससुर पर ही रेप का आरोप लगा दिया।
बुजुर्ग ने 4 साल तक यह कलंक झेला, अंत में कोर्ट ने उन्हें निर्दोष घोषित किया। दहेज हत्या से जुड़े केस में महिला के परिजन ने 90 साल की लाचार दादी सास पर भी प्रताड़ना का आरोप लगा दिया, जबकि वह वर्षों से बिस्तर थीं।
विवाद हुए तो दुष्कर्म का केस लगा दिया
इंदौर के युवक-युवती की 2020 में भोपाल में शादी हुई। कुछ दिन बाद दोनों में विवाद होने लगे। महिला ने पति पर रेप (अप्राकृतिक संबंध) सहित सास, ससुर और ननंद पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने रेप की धारा हटाने के आदेश दिए हैं।
वर्षों से बिस्तर पर थी दादी, फिर भी केस
एडवोकेट सुनील गुप्ता ने बताया, दहेज हत्या से जुड़े केस में दादी सास पर दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था। जबकि वे वर्षों से बिस्तर पर थीं। कोर्ट ने दादी का नाम हटाने के आदेश दिए।
तलाक मांगा तो लगाया रेप का आरोप
धार की युवती और इंदौर के युवक की 2019 में शादी हुई थी। एडवोकेट अपूर्व जैन ने बताया, महिला ने भरण पोषण, तलाक व घरेलू हिंसा के केस के विचारण के दौरान रेप का केस लगा दिया। 15 दिन पति जेल में रहा।
